राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार में केबिनेट मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल का आज गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। वे पिछले छह महीने से वेंटिलेटर पर थे। 72 साल के मास्टर भंवरलाल मेघवाल राजस्थान के दिग्गज दलित नेता थे। वे पिछले करीब 41 साल से राजनीति में सक्रिय थे। कांग्रेस के बड़े नेता के रुप में उनकी पहचान थी।वे चुरु जिले की सुजानगढ़ विधानसभा सीट से निर्दलीय समेत कांग्रेस की टिकट पर पांच बार (1980, 90, 98, 2008 और 2018) विधायक रहे चुके थे।

कोरोना महामारी के दौरान अपने मंत्रालय में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की वर्चुअल मीटिंग में मौजूद रहे मास्टर भंवरलाल- फाइल।

कोरोना महामारी के दौरान अपने मंत्रालय में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की वर्चुअल मीटिंग में मौजूद रहे मास्टर भंवरलाल- फाइल।

सरकारी स्कूल में पीटीआई थे, नौकरी छोड़कर पहला चुनाव लड़ा, जिसमें हारे
भंवरलाल मेघवाल पहले सरकारी टीचर हुआ करते थे। सुजानगढ़ के राजकीय झंवर स्कूल में बतौर शारीरिक शिक्षक (पीटीआई) नौकरी की शुरुआत की। काफी सालों तक टीचर रहे। इसीलिए इनकी पहचान मास्टर भंवरलाल के नाम से भी थी। वर्ष 1977 में शिक्षक की नौकरी से इस्तीफा देकर भंवरलाल मेघवाल ने इसी साल विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाया।

शेखावाटी और बीकानेर संभाग में दलित वोट बैंक पर मास्टर भंवरलाल की गजब पकड़ थी। वे कांग्रेस के दलित नेता के रुप में बड़ा चेहरा थे।

शेखावाटी और बीकानेर संभाग में दलित वोट बैंक पर मास्टर भंवरलाल की गजब पकड़ थी। वे कांग्रेस के दलित नेता के रुप में बड़ा चेहरा थे।

पहली बार में वे हार गए। फिर 1980 के चुनाव में बतौर निर्दलीय जीत दर्ज की। उसके बाद से हर बार राजस्थान विधानसभा चुनाव लड़ते आ रहे हैं। आपको बता दें कि मास्टर भंवरलाल मेघवाल के साथ राजनीति में एक अजब संयोग जुड़ा हुआ था। वो यह है कि वे एक विधानसभा चुनाव हारते थे और इसके बाद अगला जीतते थे।

बयानों के कारण चर्चित रहे मेघवाल, पिछली गहलोत सरकार में शिक्षा मंत्री पद छोड़ना पड़ा
चुरु जिले के सुजानगढ़ विधानसभा क्षेत्र से मास्टर भंवरलाल मेघवाल ने 10 बार चुनाव लड़ा। इनमें वे पांच चुनाव जीते और पांच चुनाव हार गए। पिछली बार अशोक गहलोत की सरकार में कर्मचारियों व तबादलों पर राजनीतिक बयानों की वजह से चर्चित रहे भंवरलाल मेघवाल शिक्षा मंत्री पद का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे।

13 मई की रात को घर पर बिगड़ी थी मास्टर भंवरलाल की तबियत

जयपुर में 13 मई की रात को मास्टर भंवरलाल मेघवाल अपने आवास पर थे। इस दौरान वे चक्कर खाकर गिर पड़े। उनकी बेटी बनारसी व अन्य परिजनों ने तत्काल मास्टर भंवरलाल को मानसरोवर में साकेत अस्पताल पहुंचाया। वहां चैकअप के बाद भंवरलाल को एसएमएस अस्पताल के लिए रैफर कर दिया गया।

13 मई की रात को मास्टर भंवरलाल मेघवाल की तबियत बिगड़ने पर एसएमएस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।

13 मई की रात को मास्टर भंवरलाल मेघवाल की तबियत बिगड़ने पर एसएमएस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।

प्रारंभिक जानकारी में सामने आया था कि मास्टर भंवरलाल ब्रेन हेमरेज होने से शरीर के दाहिने हिस्से में पैरालिसिस अटैक आया है। यहां मेघवाल के उपचार के लिए 7 विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम गठित की गई है। इसके बाद एयर एंबुलेंस से मेघवाल को मेदांता अस्पताल भेजा गया। तब से वह वेंटिलेटर पर उपचाराधीन थे। इस बीच 29 अक्टूबर को मास्टर भंवरलाल की बेटी बनारसी देवी का निधन हो गया।

मास्टर भंवरलाल मेघवाल को एयर एंबुलेंस से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में रैफर कर दिया गया। जहां उनका उपचार चल रहा था।

मास्टर भंवरलाल मेघवाल को एयर एंबुलेंस से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में रैफर कर दिया गया। जहां उनका उपचार चल रहा था।

परिवार में पत्नी, एक बेटा और दो बेटियां, इनमें एक बेटी का 29 अक्टूबर को हुआ निधन

चूरू जिले के सुजानगढ़ उपखंड की शोभासर ग्राम पंचायत के गांव बाघसर पूर्वी में चुनाराम मेघवाल के यहां 2 जुलाई 1948 को मास्टर भंवरलाल मेघवाल का जन्म हुआ। वर्तमान में इनका परिवार सुजानगढ़ उपखंड मुख्यालय के वार्ड बीस में पीसीबी स्कूल के पीछे स्थित जयनिवास में रहता है। भंवरलाल मेघवाल की शादी 15 मई 1965 को केसर देवी से हुई। इनके एक बेटा व दो बेटी हैं। बेटी बनारसी देवी भी राजनीति में सक्रिय थी। चुरू की जिला प्रमुख भी रही थी। उनका 29 अक्टूबर को निधन हो गया था। जबकि भंवरलाल के इकलौते बेटे मनोज व्यवसाय करते हैं।