बलरामपुर, उत्तर प्रदेश में देवीपाटन मंडल के गोण्डा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती जिलों में बसोड़ा पर्व पर मारवाड़ी समाज के हजारों श्रद्धालुओं ने शीतला माता की मंदिरों में पूजा-अर्चना की। होली पर्व के बाद पड़ने वाले सोमवार या शुक्रवार को मारवाडी समाज के श्रद्धालु माता शीतला की पूजा-अर्चना और कथा व जागरण के साथ-साथ बासी यानि ठंडा भोजन कर शीतल पेयजल ग्रहण करते हैं।

काली भवानी माता मंदिर, खैरा भवानी मंदिर, नंदा देवी मंदिर, बिजलीपुर, काली कुंडा समेत कई प्रमुख ऐतिहासिक मंदिरों में मारवाड़ी समाज के परिवारों ने पूड़ी, हलुवा, पुआ, लप्सी, बाजरा, हल्दी और अन्य सामग्रियों से कनड्वारी भर पूजा-अर्चना की।

इस दौरान मंदिरों में माता शीतला के भजन व भक्तिगीतो को अपनी लोकभाषा में गाकर महिलाओं ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मान्यताओं के अनुसार, एक बार किसी गांव में लगी भीषण आग में पूरा गांव जल गया जबकि एक वृद्ध महिला का घर सुरक्षित रहा।

लोगों के पूछने पर महिला ने बताया कि वह माता शीतला की पूजा कर बासी ठंडा भोजन करती थी। तभी से प्रमुख रूप से शीतलाष्टमी का महत्व बढ़ने लगा और हिन्दू परिवारों में शीतला माँ की पूजा होने लगी। होली के बाद के सोमवार या शुक्रवार को भी पूजा करने पर अष्टमी जैसा ही फल मिलता है।