धर्म डेस्क, लोहडी केवल पंजाब तक ही सीमित नहीं है बल्कि संपूर्ण भारत में इस त्यौहार को मनाया जाता है। अलग-अलग नामों से फसल पकने की खुशी यहां पूरे जोश के साथ लोहड़ी के रुप में मनाई जाती है। लोहड़ी का त्यौहार खुद में अनेक सौगातों को लिए होता है। फसल पकने पर किसान खुशी को जाहिर करता है जो लोहड़ी पर्व, जोश व उल्लास को दर्शाते हुए सांस्कृत्तिक जुड़ाव को दर्शाता है। लोहड़ी का पर्व मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाने की परंपरा है। लोहड़ी हंसने-गाने, एक-दूसरे से मिलने-मिलाने व खुशियां बांटने का उत्सव है।

लोहड़ी से जुड़ी मान्यताएं:-

लोहड़ी पर्व के बारे में अनेक मान्यताएं हैं जैसे कि लोगों के घर जाकर लोहड़ी मांगी जाती हैं और दुल्ला भट्टी के गीत गाए जाते हैं, कहते हैं कि दुल्ला भट्टी एक लुटेरा हुआ करता था लेकिन वह हिंदू लड़कियों को बेचे जाने का विरोधी था और उन्हें बचा कर वह उनकी हिंदू लड़कों से शादी करा देता था इस कारण लोग उसे पसंद करते थे और आज भी लोहड़ी गीतों में उसके प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। हिन्दु धर्म में यह मान्यता है कि आग में जो भी समर्पित किया जाता है वह सीधे हमारे देवों-पितरों को जाता है इसलिए जब लोहड़ी जलाई जाती है तो उसकी पूजा गेहूं की नयी फसल की बालियों से की जाती है। लोहडी के दिन अग्नि को प्रज्जवलित कर उसके चारों ओर नाच-गाकर शुक्रिया अदा किया जाता है।

नवविवाहित दम्पतियों के लिए खास:-

यूं तो लोहडी उतरी भारत में प्रत्येक वर्ग, हर आयु के जन के लिए खुशियां लेकर आती है। परन्तु नवविवाहित दम्पतियों और नवजात शिशुओं के लिए यह दिन विशेष होता है। युवक -युवतियां सज-धजकर, सुन्दर वस्त्रों में एक-दूसरे से गीत-संगीत की प्रतियोगिताएं रखते है। लोहडी की संध्या में जलती लकडियों के सामने नवविवाहित जोडे अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय व शान्ति पूर्ण बनाए रखने की कामना करते है। सांस्कृतिक स्थलों में लोहडी त्यौहार की तैयारियां समय से कुछ दिन पूर्व ही आरम्भ हो जाती हैं।

प्रसाद में पांच मुख्य वस्तुएं होती हैं:-

तिल, गजक, गुड़, मूंगफली तथा मक्का के दाने प्रसाद में रखे जाते है। आधुनिक समय में लोहड़ी का पर्व लोगों को अपनी व्यस्तता से बाहर खींच लाता है। लोग एक-दूसरे से मिलकर अपना सुख-दुख बांटते हैं। यही इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य भी है। चूंकि अग्निदेव ही इस पर्व के प्रमुख देवता हैं, इसलिए तिल, मेवा, चिवड़ा, गजक आदि की आहूति भी अलाव में चढ़ाई जाती है।

लोहड़ी पर भंगड़ा और गिद्दा की धूम:-

लोहड़ी के पर्व पर लोकगीतों की धूम मची रहती है, चारों और ढोल की थाप पर भंगड़ा-गिद्दा करते हुए लोग आनंद से नाचते नजर आते हैं। मन को मोह लेने वाले गीत कुछ इस प्रकार के होते है कि एक बार को जाता हुआ बैरागी भी अपनी राह भूल जाए। रेवडी और मूंगफली का स्वाद सब एक साथ रात भर चलता रहता है।