नई दिल्ली, मां के दूध को प्राचीन काल से अमृत के समान समझा जाता है। इस बात से विज्ञान भी सहमत है। मां का दूध केवल पोषण ही नहीं देता है बल्कि जीवन की धारा है। मां का दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में काफी फायदेमंद होता है। लेकिन अगर मां के दूध का अगर कोई स्थान ले सकता है तो वो है नारियल का दूध। एक शोध में पाया गया है कि पशुओं के दूध में लैक्टोज पाया जाता है, जो एक प्रकार का शर्करा है, जिसे पचा पाना थोड़ा मुश्किल होता है, जबकि नारियल के दूध में लैक्टोज नहीं पाया जाता है।

मलेशिया, थाईलैंड, श्रीलंका और वियतनाम जैसे देशों में शिशु को मां का दूध उपलब्ध नहीं होने पर गाय के दूध की जगह नारियल के दूध का इस्तेमाल अधिक होने लगा है।सीडीबी का कहना है कि हमने नारियल का दूध बनाने की प्रौद्योगिकी विकसित कर ली है, जो अन्य जगहों पर स्थानांतरित करने के लिए तैयार है। सीडीबी के अधिकारियों का कहना है कि नारियल रस में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा न के बराबर होती है, जबकि कार्बोहाइड्रेट 15 से 16 प्रतिशत तक होता है।