नई दिल्ली:इतिहास की घटनाएं कहीं न कहीं हमारे ज़हन में रह जाती हैं अगर इतिहास अच्छा है तो कम संभावना है कि लोग उसे याद रखें लेकिन, इतिहास में अगर काली डरावनी रातें जैसी भयानक घटनाएं हों तो वह भूले नहीं भुलाई जाती। इसी तरह आज यानि 6 दिसंबर का दिन हैं जब एक घटना से पूरा शहर जल उठा...हालांकि, उस वक्त जब यह घटित हुआ और जिन लोगों ने यह मंजर देख उनके लिए इसे भुला पाना बामुश्किल है। यह भयानक दृश्य आज भी लोगों के जे़हन में जिंदा है और एक समूदाय के लोगों को बहुत डराती है, हम बात कर रहे हैं, बाबरी मस्जिद विध्वंस की... जी हां 6 दिसंबर 1992 का दिन भारत के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज हुआ। जिसका रंग समय बीतने के साथ-साथ और भी स्‍याह हो रहा है। आज बाबरी विध्‍वंस की 26 वीं बरसी है।

6 दिसंबर 1992 के दिन लाखों कारसेवकों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को ढहा दिया था। 'एक धक्का और दो, बाबरी तोड़ दो'... ऐसे नारों की गूंज से अयोध्‍या का आसमान भी थर्राने लगा था। इस घटना के बाद हिंदू और मुस्लिम एक-दूसरे के खून के प्‍यासे हो गए और पूरे देश में सामुदायिक दंगे भड़क गए। देश हिंदू और मुस्लिम दो हिस्‍सों में बंट गया। 

हालांकि, यह घटना 1992 की है लेकिन इसके बीज 16वीं शताब्दी में ही बो दिए गए थे। कहा जाता है बाबर ने फतेहपुरी सीकरी के राजा राणा संग्राम सिंह को 1527 में हराने के बाद इस स्‍थान पर मस्जिद को बनाने के आदेश दिए। बाबर के जनरल मीर बांकी ने अयोध्‍या में 1528 में बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया। जबकि हिंदू मान्‍यता के अनुसार, यह उनके भगवान राम का जन्‍मस्‍थान है। यहां पर मस्जिद नहीं हो सकती। 

बतादें 1853 में इस विवाद ने दंगे का रूप ले लिया। दोनों समुदायों के बीच पहली बार इस विवाद पर दंगा भड़का। उसके बाद ब्रिटिश शासन ने इस स्‍थान को कंटीले तारों से घिरवाकर हिंदू और मुस्लिमों का पूजा स्‍थल अलग-अलग कर दिया। करीब 90 साल तक यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा। 

आज़ादी के बाद सरकार ने मुस्लिमों को विवादित स्थान से दूर रहने के आदेश दिए। वहीं मस्जिद के मुख्‍य द्वार पर ताला डाल दिया गया और हिंदूओं को दूसरे प्रवेश द्वार से प्रवेश दिया जाता रहा। आजादी के कुछ साल बाद 1949 में मस्जिद में भगवान राम की मूर्ति रखे जाने से विवाद और बढ़ गया। 

कई सालों तक हिंदू-मुस्लिमों के बीच चली लड़ाई के बाद कारसेवकों के विशाल समूह ने मिलकर बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को गिरा दिया और दोनों समुदाय एक-दूसरे के खून के प्‍यासे हो गए। विवादित स्‍थल का ताला खुलते ही देश भर में एक बार फिर से हिंसा भड़क गई। दिल्‍ली, मेरठ, हाशिमुपरा, कश्‍मीर देश के कई हिंसों में मंदिरों में तोड़-फोड़ किए जाने के मामले सामने आए।