नई दिल्ली. कठुआ में 8 साल की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर से पठानकोट ट्रांसफर कर दी है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पक मिश्रा, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की बेंच ने इस मामले में राज्य में हुई जांच पर भरोसा जाहिर किया और इस मामले की सीबीआई जांच से इनकार कर दिया। बेंच ने निर्देश दिए कि मामले की रोजाना सुनवाई हो और इसकी रिकॉर्डिंग की जाए। उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सुरक्षा को लेकर आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि हमारे पास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था है। बता दें कि मृतक बच्ची के पिता ने केस की सुनवाई चंडीगढ़ ट्रांसफर करने की अपील की थी। वहीं, आरोपियों ने सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी।

- बेंच ने कहा, "इस मामले में ट्रायल जम्मू-कश्मीर में लागू रनबीर दंड संहिता के हिसाब से चलेंगे। पीड़ित के परिवार और आरोपी दोनों के लिए ये सुनवाई निष्पक्ष होनी चाहिए।""पीड़ित परिवार, उनके दोस्तों और केस पेश कर रहे वकील की सुरक्षा जारी रखी जाए। इसके अलावा नाबालिग आरोपी को दी गई सुरक्षा भी जारी रखी जाए। बयानों और दस्तावेजों का उर्दू से इंग्लिश में अनुवाद कराया जाए। जम्मू-कश्मीर सरकार इस मामले में वकील नियुक्त कर सकती है।"

- उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले की सुनवाई रोज और बंद कमरे में होगी। इसकी रिकॉडिंग की जाएगी। पीड़ित के परिजनों की सुरक्षा और पहचान छुपाने के लिए मीडिया और पब्लिक को इससे दूर रखा जाएगा।सुप्रीम कोर्ट: 26 अप्रैल को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 7 मई तक किसी भी अदालत में इस मामले की सुनवाई नहीं होगी। अगर अदालत को कहीं भी ऐसा लगा कि इस मामले की सुनवाई निष्पक्ष ढंग से नहीं हो रही है तो इसे ट्रांसफर करने में देर नहीं लगाई जाएगी। बेंच ने कहा था कि हमारी सबसे बड़ी चिंता वास्तविक और यथोचित सुनवाई को लेकर है।

पीड़ित परिवार:बच्ची के पिता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि उसके परिवार, दोस्तों और वकील दीपिका सिंह राजावत को जान का खतरा है।आरोपी: दो आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी कि मामले की सुनवाई जम्मू-कश्मीर में हो और इसकी जांच सीबीआई को सौंपी जाए। इस मामले में पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मुख्य चार्जशीट 7 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की थी। नाबालिग आरोपी के खिलाफ अलग से चार्जशीट दी गई थी। इसमें बताया गया था कि किस तरह से बच्ची को हत्या से पहले कथित तौर पर अगवा किया गया, उसे नशे में रखा गया और उसके साथ दुष्कर्म किया गया।

 क्राइम ब्रांच की चार्जशीट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में 10 जनवरी को अल्पसंख्यक समुदाय की एक 8 साल की बच्ची को अगवा किया गया था। उसे रासना गांव के एक मंदिर में बंधक बनाकर गैंगरेप किया गया। बाद में उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई। फिर पत्थर से सिर कुचल दिया गया। 17 जनवरी को उसका शव मिला।

- इस मामले में गांव के एक मंदिर के 60 साल के सेवादार सांझी राम समेत 8 लोग आरोपी हैं। इनमें एक (सांझी राम का भतीजा) नाबालिग है। सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है। 10 अप्रैल को इस मामले में चार्जशीट दाखिल की गई। तब वकीलों ने पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने से रोका। इसके बाद ही इस मामले ने तूल पकड़ा।