धर्म डेस्क, मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्यदेव की तिल से पूजा क्यों की जाती है। इसके पीछे श्रीमद्भागवत और देवी पुराण में एक कथा का उल्लेख किया गया है। इस कथा के अनुसार एक बार पुत्र शनि और अपनी दूसरी पत्नी छाया के श्राप के कारण सूर्यदेव को कुष्ठ रोग हो गया था। लेकिन यमराज के प्रयास से जब सूर्यदेव निरोगी हो गए तब उन्होंने कुपित होकर शनि के घर कुम्भ राशि को जलाकर राख कर दिया।

जिस कारण शनि और उनकी माता छाया को काफी कष्टों का सामना करना पड़ा। यमदेव ने अपनी सौतेली माता और भाई शनि को कष्टों से मुक्ति दिलाने के लिए सूर्यदेव को बहुत समझाया तब जाकर सूर्यदेव शनि के घर कुम्भ में पहुंचे। सारा घर जलकर राख हो गया था। कुछ भी नहीं बचा था इसलिए शनि ने अपने पिता सूर्यदेव की पूजा काले तिलों से की।

इससे प्रसन्न होकर सूर्यदेव ने आशीर्वाद दिया कि जब मैं शनि के दूसरे घर मकर राशि में आऊंगा तब धन-धान्य से घर भर जायेगा। काले तिलों के कारण शनि देव को खोया हुआ वैभव पुनः वापस मिल गया। इसी कारण मकर संक्रांति पर सूर्य व शनि की काले तिलों से पूजा की जाती है। सूर्यदेव की तिल से पूजा करने से मान-सम्मान और वैभव की प्राप्ति होती है। सूर्यदेव को तिल चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं और घर में धन-धान्य की वर्षा करते है। इसलिए मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव को काले तिल अर्पित करें।

सूर्यदेव को प्रसन्न करने के मंत्र:-

ॐ घ्रिणी सूर्याय नमः

ॐ सूर्य देव सहस्त्रान्सो तेजो राशे जगत्पते अनुकम्पय मां भक्त्या घ्रिह्नार्घ्यम दिवाकरः किसी एक मन्त्र से दोनों अंजली अथवा लोटे से सूर्यदेव को अर्घ्य दें।