नई दिल्ली:जसप्रीत बुमराह इस समय देश के ही नहीं दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में से एक हैं. बुमराह की तेज और सटीक गेंदबाजी को उनका एक्शन और असरदार बनाता है. विशेषज्ञों की मानें तो यही एक्शन उनके लिए भविष्य में मुसीबत खड़ी कर सकता है. शरीर क्रिया विज्ञान के लेक्चरर डॉ. साइमन फेरोस का कहना है कि बुमराह का गेंदबाजी एक्शन जिस तरह का है, उससे उनके पीठ के निचले हिस्से में चोट की संभावना बढ़ सकती है. 

फेरोस और मशहूर फिजियो जॉन ग्लोस्टर ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में डिकिन यूनिवर्सिटी के खेल विभाग का हिस्सा हैं, जिन्होंने इस भारतीय तेज गेंदबाज के गेंदबाजी एक्शन का अध्ययन किया. ग्लोस्टर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर में पिछले 17 वर्षों से काम कर रहे हैं और साढ़े तीन साल तक भारतीय टीम के फिजियो भी रहे थे.  

साइमन फेरोस ने कहा, ‘बुमराह फ्रंट फुट की लाइन के बाहर गेंद को रिलीज करते हैं. इसका मतलब है कि वे गेंद को ‘पुश’ कर सकते हैं. आमतौर पर इससे दाएं हाथ के बल्लेबाज को बेहतरीन इन स्विंग गेंद फेंकी जा सकती है.’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि, अगर वह 45 डिग्री से ज्यादा मोड़ता है (जो मुझे लगता है कि वह कुछ मौकों पर ऐसा करता है) तो उसके एक्शन से उसे रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में चोट की समस्याएं हो सकती हैं.’

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में से कई को लगता है कि बुमराह का लंबे समय तक बिना चोटिल हुए बिना रहना मुश्किल होगा. जॉन ग्लोस्टर ने कहा, ‘बुमराह का अनोखा एक्शन उन्हें लगातार उस तरह की गेंद फेंकने में मदद करता है, विशेषकर यार्कर. लसिथ मलिंगा के इतने प्रभावी होने की काबिलियत उनके अनोखे एक्शन की वजह से भी थी (जिससे कभी-कभी उनकी गेंद को खेलना मुश्किल हो जाता था).’ 

ग्लोस्टर ने बुमराह के एक्शन के अपने आकलन में कहा कि उनका शरीर एक ‘बेहतरीन मशीन’ है और साथ ही उन्होंने उनके कोच की प्रशंसा भी की जिन्होंने उसके एक्शन में छेड़छाड़ करने की कोशिश नहीं की. मुख्य फिजियो के तौर पर करीब 55 सीरीज में शामिल हो चुके ग्लोस्टर ने कहा, ‘बुमराह ने अपने एक्शन में मदद के लिए अब तक मजबूती से मांसपेशियों पर ऐसा नियंत्रण बना लिया है और वह इसमें इतना स्थिर हो गया है.’