जयपुर. एक और राजस्थान विश्वविद्यालय (Rajasthan University) आगामी परीक्षाओं को लेकर पशोपेश की स्थिति में है. वहीं पूर्व में संपन्न हो चुकी परीक्षाओं की कॉपियां चैक करवाने में भी विश्वविद्यालय को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. वजह है कोरोना वायरस के चलते कुछ शिक्षकों द्वारा आंसर शीट (Answer sheet) जांचने से इनकार करना.

कॉपियां जांचने के लिए तैयार नहीं हो रहे शिक्षक
राजस्थान यूनिवर्सिटी में कोरोना संकट के कारण यूजी और पीजी की कई परीक्षाएं अटक गई थी. लिहाजा अब यूनिवर्सिटी प्रशासन इन परीक्षाओं के आयोजन को लेकर चिंतित दिखाई दे रहा है. जबकि लॉकडाउन से पहले संपन्न हो चुकी परीक्षाओं की आंसर शीट जांचने को लेकर शिक्षकों के तैयार नहीं होने के कारण बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने परीक्षाओं के बाद से ही इन उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए 50 से ज्यादा शिक्षकों से उनकी स्वीकृति मांगी थी. इसमें से आधे से भी कम लोगों ने रुचि दिखाई है.

अब प्रशासन केंद्रीय मूल्यांकन की प्लानिंग कर रहा है

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आरके कोठारी के अनुसार महज 20 शिक्षकों ने ही शुरू में कॉपी जांचने के लिए अपनी अनुमति दी. कुछ शिक्षकों ने तो कॉपियों में कोरोना वायरस होने के डर के कारण भी दूरी बनाना ही उचित समझा. इसके करण मूल्यांकन को गति नहीं मिल पाई. लेकिन आगामी दिनों में सेमेस्टर परीक्षाओं के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन केंद्रीय मूल्यांकन की प्लानिंग कर रहा है.

सेनेटाइज करवा कर परीक्षकों के घर भिजवाए जा रही हैं कॉपियां
आमतौर पर भी राजस्थान विश्वविद्यालय में शिक्षकों द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखाई जाती रही है. ऐसे में अब कोरोना को लेकर कई तरह की भ्रांतियों ने भी मूल्यांकन के कार्य की रफ्तार कम कर दी है. हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कॉपीज के बंडलों को भी सेनेटाइज करवा कर परीक्षकों के घर भिजवाए जा रहा है. साथ ही शिक्षकों से आग्रह भी किया जा रहा है कि उन्हें मूल्यांकन के दौरान उत्तर पुस्तिकाएं भेजने की व्यवस्था सुरक्षित दायरे में की जाएगी.

रिटायर्ड शिक्षकों का भी मूल्यांकन कार्य में सहयोग लिया जा रहा है
इसी के साथ प्राइवेट कॉलेज और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों तथा रिटायर्ड शिक्षकों का भी मूल्यांकन कार्य में सहयोग लिया जा रहा है. बहरहाल आरयू में इन दिनों छात्र संगठनों के बीच बाकी बची परीक्षाओं के आयोजन को लेकर खींचतान चल रही है. एक वर्ग परीक्षा कराना चाहता है और दूसरा नहीं. लेकिन इस बीच उत्तर पुस्तिकाओं के जांच में शिक्षकों के रुचि नहीं लेने के कारण पूर्व में आयोजित परीक्षाओं के मूल्यांकन में भी देरी हो रही है. इसका असर परिणाम और सत्र पर भी पड़ सकता है.