जयपुर:राजस्थान (Rajasthan) में चल रहे सियासी संकट (Political Crisis) के मद्देनजर अब 11 अगस्त की तारीख निर्याणक साबित हो सकती है. इस दिन राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) का एकल पीठ (Single Bench) बहुजन समाज पार्टी (BSP) और मदन दिलावर की ओर से दायर स्टे एप्लीकेशन पर सुनवाई के बाद अपना आदेश देगा. आज हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत माहांती के डिवीजन बेंच में बसपा और दिलावर की अपील पर सुनवाई चल रही थी. उन्होंने इस अपील को निस्तारित करते हुए जैसलमेर के डीजे को निर्देश दिया कि हाई कोर्ट से भेजे गए स्पेशल मेसेंजर के जरिए बसपा के सभी छह विधायकों को 8 अगस्त तक नोटिस तामील करवाएं. साथ ही उन्होंने फैसले में सिंगल बेंच से कहा है कि वह 11 अगस्त को स्टे एप्लीकेशन को डिसाइड कर दे.

अखबार में छपवाएं नोटिस

मामले में अपील पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नोटिस की तामील विधानसभा सचिवालय से कराने का सुझाव दिया था. स्पीकर की ओर से पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस सुझाव का विरोध किया. सिब्बल ने कहा कि भारत सरकार के 1958 के आदेशानुसार विधानसभा सचिवालय को पोस्ट ऑफिस की तरह यूज नहीं किया जा सकता है. किसी भी तरह के आपराधिक और सिविल नोटिस विधानसभा सचिवालय के जरिए तामील नहीं करवाए जा सकते हैं. इस पर मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत माहंती के खंडपीठ ने अपने फैसले में निर्देश दिया कि डीजे जैसलमेर नोटिस तामील करवाएंगे. वहीं जरूरत पड़ने पर जिला एसपी से सहयोग भी ले सकते हैं. इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वह जैसलमेर और बाड़मेर एडिशन के अखबार में भी नोटिस छपवाएं. अखबार में नोटिस की सूचना सार्वजनिक होने पर उसे नोटिस की तामील माना जाएगा.

नोटिस तामील नहीं होने से याची गए थे डिवीजन बेंच के पास
दरअसल बसपा और मदन दिलावर की ओर से सिंगल बेंच में विधानसभा अध्यक्ष के 18 सितम्बर 2019 के फैसले को चुनौती दी गई थी. जिस पर 30 जुलाई को सिंगल बेंच ने एक्स पार्टी स्टे देने से मना करते हुए विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा सचिव और बसपा से कांग्रेस में आए सभी 6 विधायकों को नोटिस जारी कर दिए थे. लेकिन नोटिस तामील नहीं होने से याचिकाकर्ताओं ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी. जिस पर आज फैसला आ गया.

बसपा करेगी वोटिंग राइट पर रोक की मांग

हाई कोर्ट में 11 अगस्त को होने वाली सुनवाई के दौरान अगर अदालत स्टे एप्लीकेशन स्वीकार कर लेती है तो विधानसभा स्पीकर के 18 सितम्बर 2019 के फैसले से पहले की स्थिति बन जाएगी. कांग्रेस में शामिल हुए 6 विधायक फिर से बसपा विधायक कहलाएंगे. ऐसे में पार्टी की ओर से जारी व्हिप की पालना उनको करनी होगी. लेकिन बसपा को लगता है कि विधायक उसके बाद भी वोटिंग के समय कांग्रेस को वोट कर सकते हैं. ऐसे में बसपा के अधिवक्ताओं का कहना है कि वो कोर्ट से विधायकों के वोटिंग राइट फ्रीज करने की भी मांग करेंगे.