जयपुर:यहां जेएलएफ (जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल) में रविवार को शशि थरूर ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर केंद्र सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा कि मजहब के हिसाब से नागरिकता देना पाकिस्तान की सोच है। महात्मा गांधी की नहीं। सीएए जिन्ना की सोच की तरफ बढ़ने का पहला कदम है। इसके बाद एनआरसी और एनपीआर इसे और आगे बढ़ा रहा है।

थरूर ने आगे कहा कि हमारा देश सभी मजहबों का देश है। अगर आप किसी मजहब के नहीं हो तो भी ये आपका देश है। मैं ये नहीं कहूंगा कि जिन्ना जीत गया है। लेकिन हम उसी तरफ जा रहे हैं। क्योंकि ये कानून जिन्ना का लॉजिक था। जो कहता था कि धर्म देश का आधार होना चाहिए। गांधी जी ने कहा था कि मेरे देश में सभी धर्म बराबर हैं और रहेंगे। सीएए लागू करने से देश पर फर्क तो पड़ा है। तभी इतना विरोध हो रहा है।

'धर्म को पहचान मानना पाकिस्तान की सोच'

उन्होंने आगे कहा, 'हमारी स्वतंत्रता की बुनियाद है कि धर्म का नागरिकता से कुछ भी लेना देना नहीं है। अपने धर्म को अपनी पहचान मानना पाकिस्तान की सोच है। महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत को सबका देश बनाएंगे। 70 साल हम इसी के साथ जिए हैं। मजहब के आधार पर किसी को नागरिकता नहीं दी जाएगी। लेकिन, अब तो आप जिन्ना के लॉजिक अपने देश में लेकर आ रहे हैं। मजहब के हिसाब से आप नागरिकता देंगे तो ये पाकिस्तान की सोच है।

'सीएए के खिलाफ राज्यों का प्रस्ताव महज उनके बयान' 
थरूर ने कहा कि बहुत से ऐसे नियम-कानून हैं जिसे केंद्र लागू करना चाहे तो उन्हें राज्य सरकार की मदद की जरूरत होती है। लेकिन, जहां तक सीएए की बात है वो सिर्फ केंद्र सरकार के हाथ में है। राज्य सरकार इसमें कुछ नहीं कर सकती। कुछ राज्यों में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पास किए हैं। मेरे खयाल से ये प्रस्ताव महज राजनीतिक बयान हैं, जो केंद्र सरकार को दिखाना चाहते हैं कि हम इससे सहमत नहीं हैं। सीएए को लागू करने में राज्य सरकारों का कोई रोल नहीं। सीएए पर केंद्र को सुप्रीम कोर्ट को ही रोक सकता है। 

'एनआरसी-एनपीआर पर केंद्र को आ सकती है मुश्किल'
उन्होंने कहा कि लेकिन जब एनआरसी-एनपीआर की बात करते हैं तो उसमें बिना राज्य सरकारों की मदद से कुछ नहीं हो सकता। क्योंकि, एनपीआर बनाने के लिए राज्य कर्मचारियों की मदद की जरूरत पड़ती है। ऐसे में अगर राज्य सरकार मना कर देगी तो मुश्किल आएगी।