जयपुर:नमक उत्पादन और देसी विदेशी पक्षियों के लिए विश्व विख्यात सांभर झील का लगातार सीना छलनी कर अवैध बोरवेल धड़ल्ले से किए जा रहे हैं. नमक उत्पादकों ने कीमती ब्राइन का दोहन कर इसके अस्तित्व को संकट खड़ा लाकर खड़ा कर दिया है. वहीं, राजस्थान सरकार की उदासीनता व नमक निकालने की होड़ में उद्यमियों ने झील में कई किलोमीटर तक बिजली की केबल व पाइप लाईनो का जाल बिछा दिया है. बता दें कि, पिछले दिनों पक्षियों की हुई ट्रासती के चलते राज्य सरकार ने इसकी रोकथाम के लिये एक कमेटी भी बनाई थी. इसके बावजूद भी नियमो की साफ तौर से धजिया उड़ाई जा रही है. जिसके चलते विश्व प्रसिद्ध झील तेजी के साथ सिमट रही है. इससे आने वाले समय में झील पर सिर्फ इतिहास बनकर रह जाने का खतरा मंडरा रहा है.

प्रसिद्ध खारे पानी की सांभर झील में हाल ही हुई देश की सबसे बड़ी पक्षी त्रासदी के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीन बार उच्च स्तरीय बैठक लेकर झील सरंक्षण पर काम कर झील को संरक्षित करने के निर्देश दिए थे. साथ ही, एनजीटी के आदेशों की पालना करने को लेकर ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे, बावजूद स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के चलते झील क्षेत्र में एनजीटी के आदेशो खुलेआम धज्जियां उड़ा कर लगातार झील का सीना छल्ली किया जा रहा है, जिसके चलते झील में अवैध बोरवेल और बिजली की केबलो का जाल बिछना शुरू हो गया है और प्रशासन अपनी आंखें मूंदे बैठा है,

सांभरझील क्षेत्र में अवैध रूप से बोरवैल खोदने वाले बोरवैल मशीन संचालकों और बोरवैल खुदाई करवाने वालों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण इनके हौसले बुलंद हैं. क्षेत्र में कई बोरवैल मशीनें रात के अंधेरे का फायदा उठाकर धड़ल्ले से इस काम में लगी हैं. इनके बारे में प्रशासन को लोगों द्वारा सूचना भी दी जाती है, लेकिन ठोस कार्रवाई की बजाय महज खानापूरी ही हो रही है. वहीं, सांभर झील में अवैध बोरवेल को लेकर सांभर साल्ट भी कहीं पीछे नहीं है. वह भी एनजीटी के आदेशों को धत्ता बताते हुए लगातार झील क्षेत्र में अवैध बोरवेल कर पानी का दोहन कर रहा है.

सांभर झील के अस्तित्व को बचाने को लेकर लगातार कई संस्थाए और स्थानीय विधायक निर्मल कुमावत भी सरकार और उच्च अधिकारियों को इसके संरक्षण को लेकर लगातार मांग कर रहे है. बावजूद इसके सांभर झील में अवैध बोरवेल और बिजली के खुले तारो का जाल बिछा है. इसके चलते झील में आने वाले लाखों देशी विदेशी पक्षियों पर भी मौत का साया मंडराता रहता है. बावजूद इसके प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा.

सांभर झील जयपुर, नागौर और अजमेर जिले की सीमा पर स्थित है. लगातार झील में सांभर साल्ट और अतिक्रमणियों द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा है.। जिससे केचमेंट एरिया घटता जा रहा है. जिसके चलते  झील अपना असली सौंदर्य खोती जा रही है. अगर झील में ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में देश-विदेश से आने वाले लाखों की संख्या में पक्षियों की तादाद और कम हो जाएगी.

सांभर झील के संरक्षण को लेकर अगर समय रहते सरकार ने उचित कदम नहीं उठाया तो आने वाले समय में झील का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा. साथ ही, यहां आने वाले देशी विदेशी पक्षियो के साथ साथ पर्यटकों में भी कमी आ रही है. सरकार को झील संरक्षण को लेकर सरकार को जल्द ठोस कार्रवाई करने की आवश्यकता है.