जयपुर: राजधानी जयपुर में 13 मई 2008 को हुए सिलसिलेवार बम ब्लास्ट केस के दोषी 4 आतंकियो को जिस कलम से जज ने फांसी की सजा सुनायी...अब ये जयपुर बार एसोसिएशन की ऐतिहासिक धरोहर हो गयी है. अपनी सेवानिवृति पर आयोजित सम्मान समारोह में डीजे अजयकुमार शर्मा प्रथम ने ये कलम जयपुर बार को सौप दिया है. इसी कलम से डीजे शर्मा ने 20 दिसंबर 2019 को जयपुर बम ब्लास्ट केस में फैसला सुनाते हुए 4 आतंकियो को फांसी की सजा सुनायी थी. बार पदाधिकारियों को ये कलम सौपते हुए डीजे शर्मा ने कहा कि इस कलम को जयपुर बार में आने वाले अधिवक्ता न्याय की सतत प्रक्रिया के लिए प्रोत्सोहित होंगे.

न्यायपालिका में 24 वर्ष की सेवा:
डीजे अजयकुमार शर्मा मूल रूप से भरतपुर निवासी है. 18 जनवरी, 1960 को जन्म डीजे शर्मा ने एलएलबी और एलएलएम तक शिक्षा ग्रहण की. उसके बाद वे 8 फरवरी, 1996 में जज बन गये. 28 मई, 2002 को इन्हें सीनियर सिविल जज कैडर दिया गया. 21 अप्रैल, 2010 को डिस्ट्रिक्ट एवं सेशन जज कैडर मिला. 6 अक्टूबर, 2018 को उनकी बम ब्लास्ट कैसेज विशेष अदालत में पोस्टिंग हुई. हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट ने उनकी सेवानिवृति से कुछ दिन पूर्व सुपर टाईम स्कैल भी दिया गया है. डीजे शर्मा नवबंर 2018 में जयपुर बम ब्लास्ट विशेष अदालत के जज नियुक्त किये गये थे. जिसमें निरंतर सुनवाई करते हुए उन्होंने 20 दिसम्बर, 2019 को इसका फैसला सुनाया.

इसी कलम से सुनायी थी फांसी की सजा:
जज अजय कुमार शर्मा प्रथम ने जयपुर बम ब्लास्ट केस के चार आरोपियों मोहम्मद सैफ, सरवर आजमी, सलमान और सैफुर्रहमान को दोषी करार दिया था. शर्मा ने इन चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी. वहीं मुजाहिद्दीन के नाम से धमाकों की जिम्मेदारी लेने वाले आरोपी मोहम्मद शहबाज हुसैन को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था. करीब साढ़े 11 साल पहले 13 मई, 2008 को जयपुर में एक के बाद एक लगातार हुए 8 सीरियल बम ब्लास्ट में 71 लोगों की मौत हो गई थी. इनमें 185 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. इस मामले में जयपुर के माणक चौक और कोतवाली थाने में 4-4 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थी.

नीब तोड़ने की परंपरा को तोड़ा था डीजे शर्मा ने:
यह प्रथा आज से नहीं बल्कि अंग्रेजों के जमाने से चलती रही है. लेकिन डीजे शर्मा ने इस परंपरा को तोड़ते हुए फांसी की सजा सुनाने के बाद इस कलम को अपने पास रखा था. कानून में ऐसा कोई प्रावधान या नियम नहीं है जिसमें जज का निब तोड़ना जरुरी हो लेकिन भावनात्मक और प्रतिकात्‍मक रूप से ऐसी कलम जिसने किसी की मौत लिखी हो उससे वापस उपयोग नहीं करने के लिए निब को तोड़ा जाता है. निब तोड़कर यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि एक बार निर्णय देने के बाद जज अपने फैसले पर दोबारा विचार ना करे. दूसरा कारण यह है कि दोबारा इस कलम से फिर किसी को फांसी की सजा ना मिलें और ना ही कोई इस तरह का अपराध करें. जज को बेमतब की ग्लानि और अफ़सोस ना हो कि उन्होंने किसी की जिंदगी को खत्म कर दिया है इसलिए प्रायश्चित के तौर पर निब को तोड़ कर यूज़लेस बना दिया जाता है. जज शर्मा ने फैसला सुनाते मसय स्याही और नीब वाले कलम का भी प्रयोग नही किया बल्कि साधारण कलम से ही फांसी की सजा सुनायी थी.

राजस्थान गौरव अवार्ड से भी सम्मानित:
डीजे अजयकुमार शर्मा को उनकी सेवा के लिए या यू कहे खासतौर से जयपुर बम ब्लास्ट के फैसले के चलते उन्हे राजस्थान गौरव अवार्ड के समारोह में सम्मानित किया गया. शुक्रवार को आयोजित राजस्थान गौरव अवार्ड समारोह में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष सी पी जोशी और जस्टिस गोवर्धन बारधार ने उन्हे सम्मानित किया.