जयपुर, शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि खेल प्रतियोगिताओं में अलग अलग प्रांत, अलग अलग भाषा अलग अलग संस्कृति होते हुए भी हमें आपस में जोड़ते हैं। विविधता में सद्‌भाव एवं एकता की मिसाल हम देख सकते हैं। उन्होंने कहा कि टोंक जिले के निवाई में राष्ट्रीय प्रतियोगिता होने से हम गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। ऎसी प्रतियोगिताऎं होनी चाहिए ताकि बालक बालिकाओं में शिक्षा के साथ-साथ बौद्धिक एवं शारीरिक विकास भी हो सके।

देवनानी बुधवार को टोंक जिले के निवाई मुख्यालय में 63 वीं विद्यालयी बालक-बालिका राष्ट्रीय खो-खो प्रतियोगिता के उद्द्याटन समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सद्भावना, मित्रता, सामूहिकता, राष्ट्रीयता के गुणों का विकास बचपन से ही होना आवश्यक हैं। खेल इन गुणों में सहायक होते हैं। इसलिए विद्यालयी शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को बेहतर नागरिक बनाने के लिए राज्य सरकार इस तरह के खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कर रही हैं।

उन्होने कहा कि हमारी सरकार राज्य व जिला स्तर पर विभिन्न खेलों की प्रतियोगिताऎ आयोजित कर खेलों को राज्य में प्रोत्साहित कर उत्कृष्ट खिलाड़ियाें के निर्माण के लिए प्रयासरत हैं। देवनानी ने विभिन्न राज्यों से प्रतिनिधित्व कर रहे छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि खेल टीम भावना एवं अनुशासन से खेले। जीत एवं हार को खेल हिस्सा बताते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों से आए खिलाड़ी एक-दूसरे की संस्कृति, भाषा, खान पान, रहन-सहन, जीवन शैली से रू ब रू हो। इससे राष्ट्रीय एकता का भाव आपके मन में निर्मित हो सकेगा।

शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि स्कूली शिक्षा के दौरान बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए खेल मैदान जरूरी हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने मनरेगा के माध्यम से खेल मैदानों के निर्माण एवं उनके चारों और चार दीवारी की व्यवस्था की है, ताकि हमारे बच्चे खेलों से वंचित न रहे। उन्होने विभिन्न राज्यों से आए बच्चों को शुभकामनाऎं देते हुए कहा कि वे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर देश का नाम रोशन करे। साथ ही शिक्षा विभाग एवं प्रशासन को निर्देश दिए कि छात्र- छात्राओं की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाए।

कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने कहा कि ऎसी खेल प्रतियोगिताएें विभिन्नता में एकता का संदेश देती हें। इसमें देश की सांस्कृतिक,राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलता हैं। उन्होने जीवन और खेल की तुलना करते हुए कहा कि सफलता एवं असफलता इसके हिस्से हैं, जिन्हे हमें स्वस्थ मन से स्वीकार करना चाहिए। उन्होने छात्र -छात्राओ को बधाई देते हुए खेल को खेल की भावना से खेलते हुए जीत का आनन्द लेने एवं हार को बदलाव और सुधार की और आवश्यकता की तरह लेने पर जोर दिया।