डीडवाना क्षेत्र में रेलवे लाइन का कार्य आज के दिन शुरू हुआ था और भारतीय रेल विभाग के आंकड़ों के अनुसार 111 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। यह यादगार पल क्षेत्र की जनता के लिए एक इतिहास बना हुआ है। भारत के प्रसिद्ध औद्योगिक बांगड़ घराने का मूल स्थान डीडवाना होने के कारण एवं नमक उद्योग होने से इस क्षेत्र में रेल सेवा का शुभारंभ आज ही के दिन हुआ था। समुद्रतल से 336 मी. की ऊंचाई पर बसे डीडवाना में भारतीय रेल का इतिहास 111 वर्ष पुराना है। आज ही के दिन 16 सितम्बर 1909 ई को डेगाना से सुजानगढ़ तक का 98 किमी लंबे मारवाड़ फ्रन्टियर रेलमार्ग को खोल दिया गया।

तत्कालीन जोधपुर नरेश महाराजा सरदार सिंह (1865-1911) के समय में मारवाड़ में रेलमार्ग के विकास का कार्य प्रारंभ हुआ। डीडवाना नमक व्यवसाय के लिए प्रसिद्ध रहा है, इसी को देखते हुए महाराज सरदार सिंह ने डेगाना से सुजानगढ़ तक के रेलमार्ग निर्माण की स्वीकृति प्रदान की। यह मीटरगेज रेलमार्ग जोधपुर बीकानेर रेल्वे के अंतर्गत आता था तथा इसे मारवाड़ फ्रन्टियर रूट कहा जाता था, उस समय सुजानगढ़ बीकानेर राज्य के अन्तर्गत आता था। इस के तहत डीडवाना के पश्चिमी छोर पर स्टेशन बनाया गया और नमक के लदान के लिए डीडवाना स्टेशन से 5 किमी दूर मारवाड़ बालिया में भी एक स्टेशन बनाया गया।

1911 में हिसार तक का रेलमार्ग तैयार हुआ था, 1915 में जसवंतगढ़ से लाडनूं के लिए 8 किमी लंबी लाइन अलग से निकाली

इतिहासकार पं. विश्वेश्वरनाथ रेउ ने अपनी पुस्तक मारवाड़ का इतिहास के खंड 2 में लिखा है कि इस रेलमार्ग के निर्माण में पहले 30 पाउंड की पटरियां प्रयुक्त की गई जिसे बाद में बदलकर 50 पाउंड की कर दी गई। रेउ ने इसके उद्घाटन के विषय में लिखा है कि विक्रम संवत 1966 भाद्रपद की 2 तिथि तदानुसार 16 सितम्बर 1909 ई को डेगाना से सुजानगढ़ तक का 98 किमी लंबे मारवाड़ फ्रन्टियर रेलमार्ग को खोल दिया गया।

इस प्रकार डीडवाना में प्रथम रेल का आगमन 16 सितंबर 1909 ई में हुआ। कुछ समय बाद 1910 में इस रेलमार्ग को बीकानेर रेल्वे के द्वारा सुजानगढ़ से रतनगढ़ तक बढ़ा दिया गया। 1911 में हिसार तक का रेलमार्ग तैयार हो गया था। उस समय यह मार्ग लाडनूं से नहीं होकर जसवंतगढ़ से होकर निकलता था और 1915 में जसवंतगढ़ से लाडनूं के लिए 8 किमी लंबी अलग से लाइन निकाली गई।

4893/4894 जोधपुर मेल शान ए मारवाड़, आज बी श्रेणी का रेलवे स्टेशन है डीडवाना
इसी रेलमार्ग पर उत्तर रेल्वे की एकमात्र समय पर चलने वाली रेल जोधपुर दिल्ली मेल जो जोधपुर दिल्ली के बीच चलती थी। यह रेल उस समय की इतनी पाबंद थी कि लोग इसके हॉर्न की आवाज सुनकर अपनी घड़ी का समय मिलान किया करते थे। इस ट्रेन को प्रतिवर्ष समय की पाबंद होने के कारण पुरस्कृत किया जाता रहा है। एक समय ऐसा भी था जब डीडवाना ब्रेड नहीं मिला करती थी तो ब्रेड के शौकीन लोग जोधपुर मेल के पेंट्रीकार से ब्रेड खरीदा करते थे। वर्ष 1994 जोधपुर-जयपुर रेलमार्ग का आमान परिवर्तन हो जाने के कारण डीडवाना का जोधपुर से सीधा सम्पर्क टूट गया और डीडवाना स्टेशन उपेक्षित सा हो गया।

1 अक्टूबर 2002 को उत्तर पश्चिम रेलवे का गठन किया गया, जिसका मुख्यालय जयपुर रखा गया। डीडवाना स्टेशन इसका हिस्सा बना। वर्ष 2008 के प्रारंभ में डेगाना सादुलपुर रेल मार्ग पर पिछले 98 वर्षों से चल रहा मीटर गेज रेल का सफर थम गया। अब मीटरगेज डीडवाना के इतिहास का हिस्सा बन गई। डीडवाना में अब आमान परिवर्तन होने वाला था।

1 अगस्त 2010 की तारीख डीडवाना के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई जब डीडवाना में रेल आने के पूरे 101 वर्ष बाद आमान परिवर्तन के पश्चात राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने डेगाना रतनगढ़ सादुलपुर ब्रॉडगेज रेलमार्ग को डेगाना से राष्ट्र को समर्पित किया। 1909 में जोधपुर महाराजा सरदार सिंह व उसके बाद 2010 में जोधपुर निवासी अशोक गहलोत ने इस रेलमार्ग का उद् घाटन किया। और दोनों ही जोधपुर के थे।