नई दिल्ली:भारत और रूस अपनी पारंपरिक दोस्ती एक बार फिर से साबित करने जा रहे हैं. अमेरिकी प्रतिबंध का खतरा होने के बावजूद भारत ने रूस से पांच S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम हासिल करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिया है. ये डील 39 हजार करोड़ रुपए की है. अब रक्षा मंत्रालय इस सौदे की राह की रुकावटें दूर करने में लगा है. सूत्रों के अनुसार, रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने एस 400 के सौदे से जुड़े कुछ मामूली परिवर्तनों को अनुमति दे दी है. डीएसी की अध्यक्ष रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि 'एस-400 सौदे का मामला अब क्लियरेंस के लिए वित्त मंत्रालय के पास जाएगा. प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली रक्षा मामलों की समिति इसे बाद में अपनी मंजूरी देगी. गौर करने वाली बात ये है कि डीएसी की बैठक अमेरिका के उस फैसले के एक दिन बाद हुई, जिसमें ट्रंप प्रशासन ने पहली 'टू-प्लस-टू' बैठक को रद्द कर दिया था. इसमें बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अमेरिकी काउंटरपार्ट से 6 जुलाई को बैठक करने वाली थीं.

अहम है ये डिफेंस सिस्टम
भारत रूस से जो डिफेंस सिस्टम खरीदने जा रहा है ये दुश्मन के रणनीतिक जहाजों, जासूसी हवाई जहाजों, मिसाइलों और ड्रोन को 400 किमी की रेंज और हवा से 30 किमी ऊपर ही नष्ट कर सकता है. इस सिस्टम को भारत के लिए एक बड़े गेमचेंजर के रूप में बताया गया था.

पीएम मोदी और पुतिन के बीच बातचीत के बाद बनी सहमति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन के बीच गोवा में 2016 में हुई बैठक में एस 400 डिफेंस सिस्टम को खरीदने पर सहमति बनी थी. इधर अमेरिका ने इस प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी हुई है.

अमेरिकी कानून से कई प्रोजेक्ट अधर में
अमेरिका अपने एक कानून सीएएटीएसए (काउंटरिंग अमेरिकाज अडवर्सरीज थ्रू सैंक्संस ऐक्ट) के जरिए दूसरे देशों को रूस से हथियार खरीदने से रोकने की कोशिश कर रहा है. इसी कारण भारत और रूस के बीच कई अहम प्रोजेक्ट अधर में लटक गए हैं.