गांधीनगर, भारत एवं जापान ने प्रशांत-हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता एवं समृद्धि के प्रति वचनबद्धता को दोहराते हुए अपनी विशेष सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने के लिए सेनाओं के बीच आदान प्रदान और रक्षा प्रौद्योगिकी एवं उत्पादन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और आतंकवाद के विरुद्ध तेवर कड़े करने का आज फैसला किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच गुरुवार को यहां महात्मा मंदिर में हुई 12वीं भारत जापान वार्षिक शिखर बैठक में ये फैसले किये गये। दोनों देशों ने निवेश में तेकाी लाने और दोनों देशों की जनता के बीच संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से 15 अहम करारों पर भी हस्ताक्षर किए। दोनों नेताओं ने करीब एक घंटे चली प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक में विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी को मकाबूत करने के उपायों पर विचार किया और द्धिपक्षीय सहयोग के सभी क्षेत्रों की समीक्षा की।

परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रम की निंदा की

दोनों नेताओं उत्तर कोरिया की स्थिति पर गहन चर्चा की और उसके परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रम की निंदा की। उन्होंने हिन्द महासागर एवं प्रशांत महासागर क्षेत्र में राजनीतिक हालात का भी जायजा लिया। दोनों देशों ने आतंकवाद पर भी गंभीर चर्चा की और पाकिस्तान में सक्रिय जैश ए मोहम्मद, लश्करे तैयबा, अल कायदा और दाइश का नाम भी लिया।

जिन दस्तावेकाों पर हस्ताक्षर किए गए उनमें पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी बढ़ाने एवं विकास कार्यक्रमों में सहयोग के लिए भारत जापान एक्ट ईस्ट फोरम का गठन करने, भारत में जापानी भाषा में शिक्षा प्रदान करने, आपदा जोखिम कम करने, इंडिया पोस्ट और जापान पोस्ट के बीच भोज्य पदार्थों को एक दूसरे के यहां पहुंचाने के लिए कूल ईएमएस सेवा शुरू करने, भारत जापान निवेश संवद्र्धन रोडमैप तैयार करने, गुजरात के मंडल बेचराज खोराज क्षेत्र में ढांचागत विकास, भारत में जापानी एयरलाइनों की असीमित उड़ानों को इजाकात देने के करार, बायोटैक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग के दो करार, खेल के क्षेत्र में चार करार एवं अनुसंधानों को साझा करने का एक करार शामिल है।

भारत जापान संबंधों की खासियत

बाद में मोदी ने अपने प्रेस वक्तव्य में कहा कि आपसी विश्वास और भरोसा, एक दूसरे के हितों और चिंताओं की समझ, और उच्च स्तरीय सतत संपर्क, यह भारत जापान संबंधों की खासियत हैं। हमारी विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी का दायरा सिर्फ द्विपक्षीय या क्षेत्रीय स्तर तक ही सीमित नहीं है। वैश्विक मुद्दों पर भी हमारा सहयोग घनिष्ठ है। मोदी ने मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेलवे परियोजना के भूमिपूजन को एक बहुत बड़ा कदम बताते हुए कहा कि यह सिर्फ हाईस्पीड रेल की शुरुआत नहीं है। भविष्य में हमारी आवश्यकताओं को देखते हुए वह इस नई रेल परिकल्पना को नए भारत के निर्माण की जीवनरेखा मानते हैं।

इस तरह से भारत की अबाध प्रगति का संपर्क अधिक तीव्र गति से जुड़ गया है। उन्होंने भारत एवं परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोग के लिए गत वर्ष हुए समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए इसके जापानी संसद में अनुमोदन होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, जापान के जनमानस, जापान की संसद, और .खास तौर पर प्रधानमंत्री आबे का ह्रदय से आभार प्रकट करता हूं। स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के विषय पर हमारे सहयोग के लिए इस समझौते ने एक नया अध्याय जोड़ा है। आबे ने अपने वक्तव्य में मेक इन इंडिया, डिजीटल इंडिया आदि कार्यक्रमों का समर्थन किया और वस्तु एवं सेवा कर लागू करने सहित आर्थिक सुधारों की सराहना की।