भारत-चीन सीमा पर हालात नाजुक बन गए हैं। चीन ने पूर्वी लद्दाख के पैंगॉन्ग त्सो के दक्षिणी इलाके स्पांगुर गैप में भारी संख्या में सैनिक, टैंक और तोपों को तैनात कर दिया है। यह इलाका भारतीय सेना की राइफल रेंज से काफी करीब है। इसके बाद भारतीय सेना अलर्ट पर है। वहीं, दोनों देशों के बीच लगातार छठवें दिन मिलिट्री लेवल की बातचीत बेनतीजा रही।

सूत्रों के मुताबिक, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने गुरुंग हिल और मगर हिल के बीच स्पांगुर गैप में यह तैनाती 30 अगस्त के बाद से शुरू कर दी थी, जब भारत ने चुशूल के पास पैंगॉन्ग त्सो के दक्षिणी किनारे की ऊंचाई वाले इलाकों पर कब्जा कर लिया था।

सरकार के सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी ने बताया कि भारतीय सेना ने भी इस इलाके में टैंक, तोपों और जवानों की तैनाती बढ़ा दी है। दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हैं। सूत्रों के मुताबिक, चीन ने अपने मिलिशिया स्क्वॉड को यहां तैनात किया है और उसे भारतीय सेना को इन ऊंचाई वाले इलाकों से हटाने या पीछे करने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह स्क्वॉड पीएलए की रिजर्व फोर्स है। इसमें ज्यादातर जवान पर्वतारोही, मुक्केबाज और स्थानीय फाइट क्लब के मेंबर्स होते हैं। ये ऊंचाई वाली जगहों पर पीएलए को मिलिट्री ऑपरेशन में मदद करते हैं।

4 घंटे तक चली मिलिट्री लेवल की बातचीत

  • पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव कम करने के लिए भारत-चीन के बीच शनिवार को लगातार छठवें दिन मिलिट्री लेवल की बातचीत हुई। हालांकि, यह बेनतीजा रही। बातचीत में ऐसी जगहों से सेना को पीछे हटाने पर चर्चा हुई, जहां दोनों देशों की सेना आमने-सामने हैं। यह बैठक चुशूल में सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक चली।
  • बैठकों का यह सिलसिला 7 सितंबर से जारी हैं। बैठकों का दौर तब शुरू हुआ, जब चीन ने 29 और 30 अगस्त की मध्यरात्रि को भारतीय इलाके पर कब्जे की नाकाम कोशिश की थी।
  • दोनों देशों ने अब अगले कुछ दिनों के अंदर अपने छठे दौर की टॉप कमांडर्स की मीटिंग का फैसला किया है। कॉर्प्स कमांडर-14 से लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और दक्षिण शिनजियांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट चीफ मेजर जनरल लियू लिन के बीच दो अगस्त के बाद से मीटिंग हो सकती है।