नई दिल्ली:भारत, मालदीव (Maldives) में महत्वपूर्ण सम्पर्क परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए 40 करोड़ डालर की कर्ज सुविधा और 10 करोड़ डालर का अनुदान देगा. विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने बृहस्पतिवार को मालदीव के अपने समकक्ष अब्दुल्ला शाहिद से विविध विषयों पर व्यापक चर्चा के बाद यह बात कही. अधिकारियों ने बताया कि 6.7 किलोमीटर की ग्रेटर माले कनेक्टिविटी परियोजना (GMCP) मालदीव में सबसे बड़ी नागरिक आधारभूत परियोजना होगी जो माले को तीन पड़ोसी द्वीपों - विलिंगिली, गुल्हीफाहू और थिलाफूसी से जोड़ेगी. जीएमसीपी की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि यह सत्तारूढ़ एमडीपी (MDP) पार्टी का प्रमुख चुनावी वादा था जिसके लिये मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने पिछले वर्ष सितंबर में जयशंकर से बैठक के दौरान भारत की सहायता मांगी थी.

जयशंकर ने ट्वीट किया, 'भारत ग्रेटर माले कनेक्टिविटी परियोजना के क्रियान्वयन करने के लिये वित्त पोषण करेगा जो 40 करोड़ डालर की कर्ज सुविधा और 10 करोड़ डालर के अनुदान के जरिये होगा. यह 6.7 किलोमीटर की पुल परियोजना है जो माले को गुल्हीफाहू बंदरगाह और थिलाफूसी औद्योगिक क्षेत्र से जोड़ेगा. इससे मालदीव की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी और बदलाव आयेगा.' उन्होंने भारत और मालदीव के बीच नियमित कार्गो सेवा शुरू करने की भी घोषाणा की ताकि दोनों देशों के बीच कारोबार और वाणिज्य को गति प्रदान की जा सके. विदेश मंत्री ने कहा, 'हम मालदीव के साथ एयर बबल (हवाई यात्रा) शुरू कर रहे हैं ताकि दोनों देशों के लोगों के बीच सम्पर्क को बढ़ावा मिल सके.' जीएमसीपी परियोजना में एक पुल और 6.7 किलोमीटर लंबे सम्पर्क मार्ग का निर्माण शामिल है. विदेश मंत्रालय ने कहा, 'एक बार यह परियोजना पूरी होने पर चार द्वीपों में सम्पर्क सुगम हो सकेगा और इससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी, रोजगार सृजित होगा तथा माले क्षेत्र में सम्र्पू शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा.'

बंदरगाह के निर्माण के लिए भी वित्तीय मदद
भारत गुल्हीफाहू में बंदरगाह के निर्माण के लिये भी वित्तीय मदद प्रदान कर रहा है. फेरी सेवा को रेखांकित करते हुए जयशंकर ने इससे द्विपक्षीय कारोबार एवं सम्पर्क को बढ़ावा मिलने एवं दोनों देशों के बीच आर्थिक गठजोड़ मजबूत होने की बात कही. विदेश मंत्रालय ने कहा कि कोर्गो फेरी सेवा से समुद्री सम्पर्क को बढ़ावा मिलेगा. इससे परिचालन लागत कम होगी और कारोबारियों का समय बचेगा. एयर बबल सेवा के सृजन का जिक्र करते हुए मंत्रालय ने कहा कि मालदीव पहला पड़ोसी देश होगा जिसके साथ एयर बबल सेवा शुरू होने जा रही है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि एयर बबल सेवा मालदीव में पर्यटकों के आगमन एवं राजस्व सृजन को भारत के समर्थन का प्रतीक है. इसमें दोनों देशों के स्वास्थ्य मानकों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा. बातचीत के दौरान जयशंकर ने वर्ष 2020-21 में मालदीव को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के कोटे के नवीनीकरण के भारत के निर्णय की जानकारी दी. इसमें आलू प्याज, गेहूं, चीनी, दाल, अंडा आदि शामिल है.

चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में मालदीव अहम
हथियारों के खरीद फरोख्त पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था सिपरी (SIPRI) के न्यूक्लियर इंफार्मेशन प्रोजक्ट के निर्देशक हेंस क्रिस्टेंसन ने ट्वीट कर कहा कि मालदीव के Feydhoo finolhu द्वीप को तत्कालीन चीनी सरकार ने 4 मिलियन डॉलर में चीन को 2016 में लीज पर दे दिया था. अब चीन यहां साउथ चाइना सी के तर्ज पर अपने बेल्ट और रोड इनिशिएटिव के रूप में भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है.

चीन ने मालदीव को कर्ज के जाल में फंसाया
भारत के वैश्विक स्तर पर बढ़ते साख से घबराए चीन ने हिंद महासागर में स्थित कई देशों को अपने कर्ज के जाल में फंसा रखा है. चीन वैश्विक व्यापार और अपने इंफ्रास्टक्चर प्लान के जरिए इन देशों में अपनी पकड़ को मजबूत कर रहा है. इस कड़ी में 90 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला मालदीव उसका पसंदीदा शिकार बना. हालांकि 2018 में सत्ता परिवर्तन के बाद से मालदीव की नई सरकार ने चीन के साथ कोई बड़ा समझौता नहीं किया है.