नई दिल्ली:एक महीने से अधिक समय बाद पेट्रोल और डीजल कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। करीब 36 दिन के अंतराल के बाद एक बार फिर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले इस अंतराल में करीब 22 बार पेट्रोल और 18 बार डीजल के दाम तेल कंपनियों ने कम किए थे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के बढ़ते दाम तथा रुपए में कमजोरी से ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। गुरुवार को पेट्रोल की कीमत में जहां 16 पैसे प्रति लीटर तथा डीजल में 12 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने ओपेक के 10 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन बढ़ाने के बाद करीब आठ दिन तक मूल्यों में संशोधन रोका हुआ था। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 75.55 रुपए प्रति लीटर से 75.71 रुपए प्रति लीटर और डीजल 67.38 रुपए से 67.50 रुपए प्रति लीटर हो गई है। सार्वजनिक क्षेत्रों की तीनों पेट्रोलियम विपणन कंपनियों इंडियन आयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने 26 जून से पेट्रोल, डीजल कीमतों में संशोधन नहीं किया है।

इंडियन आयल कॉरपोरेशन के चेयरमैन संजीव सिंह ने कहा, ‘हमने ओपेक के फैसले के मद्देनजर पिछले कुछ से दिन से कीमतों में संशोधन नहीं किया है। हालांकि, जुलाई से 10 लाख बैरल प्रतिदिन के उत्पादन बढ़ाने के फैसले का लाभ ईरान मुद्दे की वजह से खत्म हो गया है।’ ओपेक ने जहां पिछले महीने कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया, वहीं अमेरिका की ओर से भारत और चीन सहित अन्य देशों पर दबाव डाला जा रहा है कि वे चार नवंबर तक ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद कर दें। सिंह ने कहा कि ईरान प्रतिदिन 23 से 25 लाख बैरल का उत्पादन करता है।

अब दुनिया के देश इतनी मात्रा के लिए अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। इससे कीमतों पर दबाव पड़ा है। कर्नाटक चुनाव के बाद तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी करना शुरू किया था। इसके बाद पेट्रोल और डीजल के दाम को जीएसटी में शामिल करने की बात भी उठी। हालांकि राज्यों के विरोध के बाद हालांकि अभी इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है।