राजस्थान में गहलोत सरकार के कैबिनेट मंत्री भंवरलाल मेघवाल का सोमवार की शाम निधन हो गया। 72 साल के मेघवाल ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में आखिरी सांस ली। वह कई बीमारियों से जूझ रहे थे। 18 दिन पहले यानी 29 अक्टूबर को ही उनकी बेटी बनारसी मेघवाल की भी मौत हुई थी।

भंवरलाल की तबियत 13 अप्रैल को खराब हुई थी। उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ था। शुरूआत में उन्हें जयपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालात में सुधार न होने पर 13 मई को उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया। मेदांता ले जाते समय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद एयरपोर्ट पर पहुंचे थे। यहां भी वह कई दिनों से वेंटिलेटर पर थे। सोमवार को उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ गई।

इंदिरा गांधी के समय कांग्रेस से जुड़े, बड़े दलित नेता के रूप में उभरे

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय से ही भंवरलाल कांग्रेस से जुड़े थे। धीरे-धीरे उन्होंने पार्टी और दलितों के बीच अच्छी पैठ बना ली थी। उन्हें कद्दावर दलित नेता के रूप में जाना जाता है। शेखावाटी और बीकानेर संभाग के दलित वोट बैंक में उनकी खासी पकड़ थी। भंवरलाल के पास फिलहाल सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और आपदा प्रबंधन मंत्रालय था।

भंवरलाल एक बेहतर प्रशासक माने जाते थे। वे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पिछली सरकार में भी शिक्षा मंत्री थे। वर्तमान में चुरू की सुजानगढ़ सीट से विधायक थे। अब तक 5 बार विधायक रह चुके हैं।

5 दिन पहले ही पत्नी पंचायत समिति की सदस्य बनी थीं

भंवरलाल के परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी है। उनकी पत्नी केसर देवी पांच दिन पहले ही पंचायत समिति सदस्य बनी हैं। कांग्रेस ने केसर देवी को चुरू जिले के सुजानगढ़ में शोभासर ब्लॉक में पंचायत समिति सदस्य का प्रत्याशी बनाया था। यहां वह निर्विरोध निर्वाचित हुई हैं।

बयानों के कारण हमेशा चर्चा में रहे

मास्टर भंवरलाल का राजनीतिक कॅरियर 1977 से शुरू हुआ था। चूरू जिले के सुजानगढ़ विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने 10 बार चुनाव लड़ा। जिसमें 5 बार (1980, 90, 98, 2008 और 2018) जीत मिली। वह हमेशा अपने बयानों से चर्चा में रहे। पिछली बार गहलोत सरकार में शिक्षा मंत्री रहते हुए कर्मचारियों व तबादलों को लेकर काफी घिर गए थे।