नई दिल्‍ली:जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu Kashmir) के श्रीनगर (Srinagar) में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में अलगाववादी संगठन तहरीक-ए-हुर्रियत के अध्यक्ष अशरफ सहराई (Ashraf Sehrai) के आतंकी बेटे जुनैद सहराई (Junaid Sehrai) सहित दो आतंकवादी मारे गए हैं. जुनैद सहराई मार्च 2018 से लापता था और बाद में एके-47 थामे हुए उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी.

आतंकी जुनैद सहराई ने कश्मीर विश्वविद्यालय से एमबीए की अपनी डिग्री पूरी की थी.  प्र‍काशित खबर के मुताबिक अशरफ सहराई अधिक कट्टर माने जाते हैं. उन्‍होंने बेटे के आतंकी बनने के बाद मीडिया इंटरव्यू में कहा था कि जम्मू और कश्मीर की मौजूदा पीढ़ी पढ़ी-लिखी है. यह पीढ़ी अपना रास्ता खुद चुन सकती है. भारत सरकार को इस बात का अहसास होना चाहिए कि आज की पीढ़ी 1950 की नहीं है, जब शेख अब्दुल्ला लोगों की अगुआई कर रहे थे. उन्‍होंने कहा था कि यह पीढ़ी 1990 की है. ये पी‍ढ़ी हर बात समझती है. वे लोग किसी दबाव को नहीं सहेंगे. अगर उनका अधिकार छीना जाता है तो वह सवाल करते हैं और लड़ने के लिए बंदूक उठाते हैं.

बता दें कि अलगाववादी संगठन तहरीक-ए-हुर्रियत के अध्यक्ष अशरफ सहराई ने 23 मार्च, 2018 को श्रीनगर के सदर पुलिस स्‍टेशन में बेटे जुनैद की गुमशुदगी की सूचना दी थी. तब जुनैद की उम्र 28 साल थी. पुलिस ने उनकी सूचना पर जुनैद की तलाश शुरू की थी. लेकिन 24 घंटे बाद ही आतंकी बने जुनैद की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी. उसके हाथों में एके-47 राइफल थी.

अशरफ सहराई ने बेटे जुनैद से आतंकवाद से दूर रहने की अपील करने से भी मना कर दिया था. उस समय जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद्य ने भी उनसे अपील की थी कि वह अपने बेटे से आतंक छोड़ने की अपील करें. लेकिन उन्‍होंने मना कर दिया था. बता दें कि यह पहला ऐसा मामला है, जब जम्मू कश्मीर के किसी अलगाववादी नेता का बेटा आतंकी संगठन में शामिल हुआ हो.