नई दिल्ली: भगवान विष्णु के अवतारों के बारे में तो आपने सुना ही होगा। जब जब पाप बढे हैं, धरती पर तब किसी ना किसी रूप में भगवान विष्णु पाप का विनाश करने के लिए धरती पर प्रकट हुए हैं। विष्णु जी की तर्जनी उंगली में हमेशा देखा गए सुदर्शन चक्र ने देवताओं की रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन आपने कभी सोचा है यह चक्र विष्णु जी के पास कैसे आया? तो चलिए आज हम इस कहानी के माध्यम से आपको भगवान विष्णु जी के सुदर्शन चक्र की प्राप्ति के बारे में बताते है। 

जब धरती पर राक्षसों का अत्याचार बेहद अधिक होने लगा था। तब सभी देवता परेशान होकर भगवान विष्णु के पास पहुंचे और अत्याचारों से बचने के उपाय की मांग की। उसके बाद भगवान विष्णु जी ने कैलाश पर्वत जाकर भगवान शिव जी की आराधना की थी। विष्णु भगवान शिव के स्तुति के दौरान एक कमल अर्पण करते है। तब भगवान शिव ने विष्णु जी की परीक्षा लेने के लिए उनके द्वारा अर्पण किए गए कमल में से एक कमल को छुपा दिया। विष्णु जी, शिव जी की यह माया समझ नहीं पाए थे तब विष्णु जी ने एक कमल की पूर्ति के लिए अपना एक आंख निकालकर शिव जी को अर्पित कर दिया था।

भगवान विष्णु जी की यह अपार भक्ति देखकर भगवान शिव जी काफी प्रसन्न हो गए। तब जाकर विष्णु जी को शिव ने अजेय अस्त्र सुदर्शन चक्र दिया। शिव जी ने भगवान विष्णु से कहा कि इस चक्र को लेकर निर्भीक होकर शत्रुओं का अंत कीजिए तब इस प्रकार भगवान विष्णु जी ने राक्षसों का संहार किया था। भगवान शिव जी ने सुदर्शन चक्र का निर्माण किया था इस प्रकार भगवान विष्णु जी को राक्षसों के संहार करने हेतु भगवान शिव से सुदर्शन चक्र की प्राप्ति हुई थी।