नई दिल्ली:अयोध्या के विवादित स्थल पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से फैसला आने में देरी होने से यहां राम मंदिर निर्माण के लिए अलग-अलग विकल्प पर चर्चा हो रही है. कुछ सांसद जहां संसद में प्राइवेट बिल लाने की बात कह रहे हैं तो कुछ लोग दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से यहां राम मंदिर बनवाने की कोशिश कर रहे हैं. इन्हीं चर्चाओं के बीच दिल्ली में जुटे देशभर के साधु-संत राम मंदिर को लेकर धर्मादेश जारी करेंगे. बताया जा रहा है कि संतों के सम्मेलन में श्रीश्री रविशंकर भी शामिल हो सकते हैं. शनिवार को तालकटोरा स्टेडियम में शुरू हुए तीन हजार साधु-संतों के सम्मेलन में रविवार को धर्मादेश जारी किया जाएगा. इसके साथ ही साधु-संतों ने प्रस्ताव जारी कर इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार को साधुवाद दिया.

रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष रामविलास वेदांती ने दिसंबर में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू होने के अपने पुराने दावे को फिर दोहराया और कहा कि लखनऊ में मस्जिद का निर्माण होगा. मस्जिद के निर्माण की वेदांती की बात पर कुछ संतों ने आपत्ति जताई. अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष जगदगुरू रामानंदचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य ने कहा कि हमारा काम मस्जिद बनाने का नहीं है, लेकिन विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने साफ किया कि वेदांती के प्रस्ताव में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है.

इससे पहले अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिये कानून बनाने संबंधी अपने अभियान के तहत विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एवं कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मिलेगा. 

विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि नवंबर माह में परिषद देश के सभी क्षेत्रों के सांसदों से भेंट करेगी और उनसे कहेगी कि उनके मतदाता अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण चाहते हैं, ऐसे में वे कानून बनाने में सहयोग करें.

यह पूछे जाने पर कि क्या वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राहुल गांधी, सोनिया गांधी से भी मिलेंगे, विहिप के कार्याध्यक्ष ने कहा, ‘हम उनसे आग्रह करेंगे और वे समय देते हैं तब उनसे मुलाकात करेंगे. हम सभी सांसदों से मिलेंगे.’ उन्होंने जोर दिया कि देश का जनमानस राम मंदिर के निर्माण के पक्ष में है, ऐसे में चाहे कांग्रेस हो, तृणमूल कांग्रेस हो या कोई अन्य दल हो.. उनके लिये इसका विरोध करना कठिन होगा. विहिप के एक अन्य पदाधिकारी ने बताया कि परिषद का सभी दलों के सांसदों से मिलने का कार्यक्रम है, चाहे वे किसी भी दल के हों.

उन्होंने बताया कि संसदीय क्षेत्र में सभाओं का आयोजन किया जायेगा और एक शिष्टमंडल उस क्षेत्र के सांसद से मिलेगा जिसमें विहिप, संत समाज एवं स्थानीय लोग शामिल होंगे. विहिप ने इसके साथ जोर दिया कि सरकार को सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर या संबंधित भूमि का अधिग्रहण करने के लिये कानून बनाकर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए.

कुमार ने कहा, ‘हमारे समक्ष सोमनाथ मंदिर के निर्माण का उदाहरण है . सोमनाथ मंदिर को मध्यकाल में आक्रमणकारियों ने कई बार तोड़ा था . ऐसे में देश की आजादी के बाद खंडहर पर मंदिर के निर्माण के लिये कानून बनाया गया था.’ 

उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर के निर्माण को प्रायोजित भारत सरकार ने किया था लेकिन पैसा जनता ने जुटाया था. इसके लिये एक ट्रस्ट का गठन किया गया था जिसे निर्माण, रखरखाव आदि का कार्य सौंपा गया था. कुमार ने कहा कि सरकार कानून बनाकर संबंधित भूमि का अधिग्रहण भी कर सकती है और इस भूमि को उस समिति को सौंप सकती है जो इस विषय और आंदोलन को आगे बढ़ा रही है और नेतृत्व प्रदान कर रही है. विहिप के कार्याध्यक्ष ने कहा कि इन दोनों ही स्थितियों में कानून लाने की जरूरत होगी. विहिप का रूख स्पष्ट है कि इस मुद्दे पर अदालत के फैसले की अनंत काल तक प्रतीक्षा नहीं की जा सकती. ऐसे में कानून लाने की जरूरत है. 

वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘यह सब राजनीतिक फायदे के लिये किया जा रहा है . अगर वे कानून बनाना चाहते हैं तो किसने रोका है. क्या वे चार साल से सो रहे थे?’ उन्होंने कहा कि अब अदालत ही तय करेगी कि अयोध्या मामले की सुनवाई कब होगी, यह कोई दूसरा तय नहीं कर सकता है.