नई दिल्ली: स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को लोगों से अपील की कि वे जीका वायरस को लेकर नहीं घबराएं. इसके साथ ही मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि जीका वायरस का प्रसार नियंत्रण में है. स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार राजस्थान में इस बीमारी से 29 लोगों के पीड़ित होने की पुष्टि हुई है. मंत्रालय ने कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है और सब कुछ नियंत्रण में है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने कहा,‘हमारे मजबूत निगरानी तंत्र की वजह से जीका के मामलों की पहचान कर ली गई है. हमारी निगरानी बहुत मजबूत है और ऐसे सभी मामलों की पहचान हो गई है. हमारे मानक प्रोटोकॉल हैं और डब्ल्यूएचओ के साथ साझेदारी में हम उन मामलों को फॉलो करके देखते हैं कि मामला इकलौता है या किसी से जुड़ा हुआ है.’

उन्होंने कहा,‘आईसीएमआर, डीजीएचएस लगातार मौजूदा हालात पर नजर रख रहे हैं. मैं भारत के नागरिकों को आश्वासन देना चाहता हूं कि सबकुछ नियंत्रण में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है.’ प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सोमवार को जीका वायरस के फैलने के बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय से एक रिपोर्ट मांगी थी.

मंत्रालय के अनुसार इस रोग के नियंत्रण और रोकथाम उपायों में राज्य सरकार की मदद के लिए सात सदस्यीय एक उच्चस्तरीय केंद्रीय टीम जयपुर में है. स्थिति की नियमित निगरानी के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) में एक नियंत्रण कक्ष शुरू किया गया है. 

जयपुर में प्रभावित लोगों में से एक बिहार से है और वह हाल ही में सिवान स्थित अपने घर गया था. इसको देखते हुए बिहार ने अपने सभी 38 जिलों में परामर्श जारी कर जीका वायरस संक्रमण जैसे लक्षण वाले लोगों पर करीबी नजर रखने को कहा है.

सभी संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है और मच्छरों के नमूने लिए जा रहे हैं. प्रयोगशालाओं को अतिरिक्त जांच किट मुहैया कराए गए हैं. अधिकारी ने बताया कि संबंधित क्षेत्र में सभी गर्भवती माताओं की निगरानी की जा रही है और राज्य सरकार के नियमों के अनुसार क्षेत्र में जरूरी उपाय किए जा रहे हैं.

मच्छरों से पैदा हुए जीका वायरस रोग के लक्षण अन्य वायरल संक्रमण जैसे डेंगू आदि के समान हैं. इसके लक्षणों में बुखार, त्वचा पर चकत्ते, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द सिरदर्द आदि शामिल हैं.

भारत में पहली बार यह बीमारी जनवरी-फरवरी 2017 में अहमदाबाद में फैली. दूसरी बार 2017 में यह बीमारी तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले में पाई गई. दोनों ही मामलों में सघन निगरानी और प्रबंधन के जरिए इस पर सफलतापूर्वक काबू पा लिया गया. यह बीमारी स्वास्थ्य मंत्रालय के निगरानी रडार पर है. हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की अधिसूचना के अनुसार 18 नवंबर, 2016 से इसके संबंध में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिन्ता की स्थिति नहीं है.