नई दिल्ली:सावन का महीना अपने साथ कई त्योहार भी लेकर आता है। भोले की भक्ति के इस मास में लड़कियों और महिलाओं के व्रत और त्योहार आते हैं। सुहागनों के बीच हरियाली तीज का अपना ही महत्व है। राजस्थान, हरियाणा, बिहार और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

हरियाली तीज का महत्व
हरियाली तीज सावन महीने की शुक्‍ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की शादी रचाई जाती है। इस दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। वहीं कई जगहों पर कुवांरी लड़कियां अच्‍छे पति की कामना में इस व्रत को रखती हैं। मान्‍यता है कि तीज का व्रत रखने से विवाहित स्त्रियों के पति की उम्र लंबी होती है और अविवाहित लड़कियों को मनचाहा जीवन साथी मिलता है। साल में कुल चार तीज मनाई जाती हैं, जिनमें हरियाली तीज का विशेष महत्‍व है। इस बार यह त्‍योहार 13 अगस्‍त को मनाया जाएगा।

कब-कब आती है तीज
हिन्‍दू कैलेंडर में साल में कुल चार तीज मनाई जाती हैं।  अखा तीज को अक्षय तृतीया तीज भी कहते हैं। बैसाख महीने की शुक्‍ल पक्ष तृतीया को अक्षया तृतीया तीज मनाई जाती है। इस बार अखा तीज 18 अप्रैल को थी।
हरियाली तीज सावन महीने की शुक्‍ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इस बार 13 अगस्‍त को हरियाली तीज मनाई जाएगी। कजरी तीज भाद्रपद यानी कि भादो माह के कृष्‍ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज मनाई जाती है। इस बार 29 अगस्‍त को मनाई जाएगी। हरतालिका तीज भादो माह के शुक्‍ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इस बार 12 सितंबर को हरतालिका तीज मनाई जाएगी।

हरियाली तीज का शुभ मुहूर्त
हरियाली तीज की तिथि 3 अगस्‍त की सुबह 8 बजकर 38 मिनट पर शुरु होगी। दूसरे 14 अगस्‍त की सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर हरियाली तीज समाप्‍त हो जाएगी।

कैसे मनाते हैं हरियाली तीज
हरियाली तीज के दिन सुहागिन महिलाएं दिन भर व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और मेहंदी लगाने के साथ ही हरे रंग के कपड़े और हरी चूड़ियां पहनती हैं। दिन-भर स्त्रियां तीज के गीत गाती हैं और नाचती हैं। सावन में झूला झूलने का भी महत्व है इसलिए इस दिन महिलाएं मिलकर झूला भी झूलती हैं। शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन के बाद चंद्रमा की पूजा की जाती है। इस दिन सुहागिन स्त्रियों को घर के बड़े-बुजुर्ग या सास-ससुर श्रृंगार दान देते हैं।

हरियाली तीज की पूजन विधि
सुबह उठकर स्‍नान करने के बाद व्रत का संकल्‍प लें। घर के मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की मूर्ति स्थापित करें। अब इन मूर्तियों की विधि-विधान से पूजा करें। फिर माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव को बेल पत्र और पीला वस्‍त्र चढ़ाएं। तीज की कथा पढ़ने के बाद आरती करें। अगले दिन सुबह माता पार्वती को सिंदूर अर्पित कर भोग चढ़ाएं। प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत का पारण करें।