नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लगभग दो दिनों के भीतर 30 बच्चों की मौत की घटना के बाद पूरा देश शासन-प्रशासन से जवाल पूछ रहा है। वहीं इस अफरातफरी के माहौल में एक शख्स ऐसा है जिसे मरने वाले बच्चों के परिजन तक मसीहा मान रहे हैं। इन्सेफेलाइटिस से पीड़ित बच्चों के परिजन इसी शख्स से उम्मीदें लगाए हुए है। यह शख्स कोई और नहीं बल्कि इसी बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर कफील खान हैं। डॉक्टर साहब इन्सेफेलाइटिस रोग के विशेषज्ञ हैं। गुरुवार की रात करीब 2 बजे अस्पताल से फोन आया कि ऑक्सीजन खत्म होने को है। उस वक्त अस्पताल में इन्सेफेलाइटिस से पीड़ित करीब 400 बच्चे भर्ती थे। यह शब्द सुनते ही कफील खान हड़बड़ा गए और अपने ड्राइवर को जगाया।

डॉक्टर कफील आनन-फानन में अपने दोस्त के निजी क्लिनिक में पहुंचे। यहां से ऑक्सीजन का तीन जंबो सिलेंडर लेकर के सीधे बीआरडी अस्पताल पहुंचे। फटाफट ऑक्सीजन का सिलेंडर पाइप से जोड़ा गया और मौत से जूझ रहे बच्चों को राहत मिल गई। इतने सारे बच्चों के बीच महज तीन सिलेंडर कितनी देर चलता, सुबह होते-होते ऑक्सीजन फिर से खत्म हो गया।

डॉक्टर कफील पूरी रात शासन-प्रशासन से ऑक्सीजन के सिलेंडर मुहैया कराने की कोशिश करते रहे, लेकिन कुछ नहीं हो सका। ऑक्सीजन खत्म होते ही बच्चों की सांसें थमने लगी। अस्पताल के कर्मचारियों और परिजनों का कहना है कि हर बच्चे की मौत की खबर के साथ डॉक्टर कफील उतावले होते जा रहे थे। वे आईसीयू वार्ड में कभी इस मरीज के पास जाते तो कभी उसके पास। उनके चेहरे से साफ झलक रहा था कि वे बिल्कुल असहाय दिख रहे थे।

डॉक्टर कफील खान के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि उन्होंने पिछले महीने ही चिकित्सा विभाग के आला अधिकारियों को बता दिया था कि उनके पास केवल पांच डॉक्टर हैं। उनके कहने पर कुछ अस्थाई डॉक्टर यहां भेजे गए। फिलहाल 12 डॉक्टर हैं। कफील खान कहते हैं कि 400 बच्चों का इलाज महज 12 डॉक्टर कैसे कर सकते हैं। डॉक्टर कफील खान के ड्राइवर सूरज पांडे का कहना है कि इन दिनों डॉक्टर साहब सुबह 8-9 बजे अस्पताल पहुंच जाते हैं और रात 12 बजे से पहले घर नहीं लौट पाते हैं। बच्चों की मौत की रात को डॉक्टर कफील खान करीब ऑक्सीजन पहुंचाकर 3 बजे अस्पताल से लौटे थे।

इलाके के लोग बताते हैं कि डॉक्टर कफील खान बस्ती जिले के रहने वाले हैं। वे इन्सेफेलाइटिस से होने वाली मौत को करीब से देखते आए हैं। उन्हें बीआरडी कॉलेज में आए हुए करीब डेढ़ साल हुए हैं, लेकिन जिस ईमानदारी के साथ मरीजों का इलाज करते हैं, जिसके चलते इलाके के लोग उन्हें मसीहा कहते हैं। इन्सेफेलाइटिस से पीड़ित हर बच्चे के परिजन अस्पताल में पहुंचते ही कफील खान के बारे में पूछते हैं। वे जिद्द करते हैं कि वे अपने मासूम का इलाज केवल कफील खान से ही कराएंगे।

लोग बताते हैं कि अगर कफील खान घर जाने के लिए गाड़ी में बैठ भी जाएं और किसी मरीज का परिजन उनके सामने आ जाए तो वे वहीं रुक जाते हैं और इलाज करके ही घर लौटते हैं। गोरखपुर के रहने वाले पीयूष मिश्रा और दृगराज मधेशिया ने बताया कि डॉक्टर कफील खान अपने पेशे को लेकर बेहद ईमानदार हैं। वे सरकारी अस्पतालों में तैनात दूसरे डॉक्टरों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं हैं।