नई दिल्ली़, अच्छे दिन का वादा करके जब साल 2014 में बीजेपी सरकार सत्ता में आई तो लोगों को सरकार से बहुत उम्मीदें थी। बीजेपी ने अपने चुनावी मेनीफेस्टो में जनता से बेरोजगारी, महंगाई को दूर करने के ऐसे वादे किए कि लोगों को लगने लगा कि बीजेपी सरकार के आने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में खासा परिवर्तन होगा लेकिन सरकार द्वारा लोगों को दिखाए गए सपने मुंगेरी लाल के हसीन सपने बनकर रह गए। जैसे ही सरकार ने नोटबंदी का अहम निर्णय लिया, ऐसा लगा जैसे सरकार ने लोगों के मुंह से निवाला ही छीन लिया

नोटबंदी ने लोगों को किया परेशान

नोटबंदी के दौरान लोग अपने ही पैसों के लिए लंबी कतारों में घंटों खड़े रहते और इसके बाद भी कई बार तो उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ता। सरकार ने कहा कि नोटबंदी कालेधन को वापस लाने के लिए की जा रही है लेकिन हालहि में रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार नोटबंदी के बाद 99 प्रतिशत पुराने नोट बैंकों में वापस आ गए, मात्र एक प्रतिशत नोट ही वापस नहीं हुए, वहीं नए नोटों को छापने में करोंड़ो रूपए बर्बाद हो गए। तो ऐसे में आम आदमी को बीजेपी सरकार द्वारा की गई इस नोटबंदी से कैसे लाभ हुआ और काला धन कहाँ गया इसके बारे में जनता अभी भी जानने के लिए उत्सुक है। 

बैंक ट्रांजेक्शन की लिमिट तय करना कितना सही

नोटबंदी के इस सदमे से लोग उबरे भी नहीं थे कि सरकार द्वारा बैंक ट्रांजेक्शन को सीमित करने का फैंसला ले लिया गया, इसके तहत एक माह में केवल एटीएम से पांच बार ही पैसे निकाले जा सकते हैं और बैंकों में लेने-देन की सीमा भी सीमित है अगर इससे ज्यादा का कोई लेन-देन करता है तो उसे इसके लिए चार्ज पे करना होगा। अब सोचिए एक इंसान अपने ही पैसे को बैंक में न तो बार-बार जमा करा सकता है और न ही इसे वापस निकाल सकता है। ऐसे में लोग अपने पैसों को बैंकों में रखने से कतराने लगे हैं और हालहि में आए आंकड़ों में यह तथ्य सामने आया है कि इससे बैंकों को करोंड़ो रूपए का घाटा हुआ है। आखिर इससे देश का विकास कैसे होगा इसके बारे में समझना थोड़ा मुश्किल लगता है।


गोल्ड की लिमिट तय कर महिलाओं को किया निराश

बीजेपी सरकार ने एक और अहम फैसला लिया ये महिलाओं के लिए कटाक्ष साबित हुआ, सरकार ने महिलाओं को गोल्ड रखने पर लिमिट तय की । इससे अब महिलाएं सरकार द्वारा तय की गई सीमा से ज्यादा सोना अपने पास नहीं रख सकती हैं। सोना महिलाओं के जीवन भर काम आने वाली पूंजी है जो विपरीत समय में उनके काम आता है। ऐसे में सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले से महिलाएं कितनी खुश हैं इसके बारे में आप उनसे जानकारी ले सकते हैं।

जीडीपी दर

किसी भी देश की जीडीपी दर उस देश की अर्थव्यवस्था को दर्शाती है। ये अर्थव्यवस्था के आर्थिक प्रदर्शन का एक बुनियादी माप होती है, सेंट्रल स्टेटिस्टिक्स ऑफिसर द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन माह में जीडीपी दर गिरी है। वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर 5.4 प्रतिशत ही रही जो 2016-17 की इसी तिमाही में 7.6 प्रतिशत की विकास दर से काफी कम है। वित्त, बीमा, रियल इस्टेट और सेवा के क्षेत्र भी 9.4 से गिरकर 6.4 प्रतिशत पर आ गया है । जीडीपी दर इस तरह से गिरना सरकार के विकास पर सवालिया निशान खड़े करता है। 

पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों ने आम इंसान को किया परेशान

जहां दूसरे देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी कमी आई है वहीं भारत में लगातार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही खाध्य पदार्थों की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। बीजेपी सरकार का ये विकास आम आदमी की समझ से बाहर होता जा रहा है।

बेरोजगारों की उम्मीदों पर फेरा पानी

बीजेपी ने 2014 के चुनावों के दौरान अपने मेनीफेस्टो में रोजगार को अपने मुख्य एजेंडे में शामिल किया था, लेकिन तीन साल होने के बाद भी अभी तक बड़े-बड़े महकमों में जो पद सालों से खाली है वो भी अब तक नहीं भर पाए हैं। पिछले तीन सालों में मोदी सरकार उतना रोजगार उपलब्ध नहीं करा पाई है जितना देश को चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक देश में अब भी 6 करोड़ 5 लाख 42 हजार लोग बेरोजगार हैं। ऐसे में ये कहना अनुचित नहीं होगा कि बीजेपी सरकार ने बेरोजगारों के लिए अभी तक कुछ खास नहीं किया।