जयपुर:अपनी शिष्या से दुष्कर्म के आरोपी दाती महाराज के खिलाफ सीबीआई को सौंपने की मांग को लेकर दायर याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने क्रिमिनल रिट पिटीशन में तब्दील कर क्रिमिनल बेंच के पास भेज दी। इस पर 11 जुलाई को सुनवाई होगी। उधर, दाती के खिलाफ राजस्थान में भी तीन स्तरों पर जांच चल रही है। राज्य महिला आयोग को दाती के खिलाफ जांच में भारी गड़बड़ियां मिली हैं। आयोग की रिपोर्ट में जो सवाल उठाए गए हैं, दाती के लिए उनका जवाब देना मुश्किल हो सकता है।

आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने दाती आश्रम में मिली अनियमितताओं के बाद पाली कलेक्टर को पत्र लिखकर निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर बिंदुवार जांच करके रिपोर्ट देने के लिए कहा है। पाली कलेक्टर सुधीर शर्मा ने कहा- "शिक्षा विभाग, बाल कल्याण समिति और संबंधित विभागों से कहा गया है कि वे जाकर दाती के आश्रम की जांच करें। जांच अंतिम चरण में है। हम जल्द ही महिला आयोग को अपनी रिपोर्ट भेज देंगे। महिला आयोग ने शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी और उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी को भी पत्र लिखकर दाती आश्रम की जांच के लिए कहा है।"

महिला आयोग को दाती के आश्रम को लेकर गड़बड़ियां मिली हैं। इनमें चार खुलासे हुए हैं:

1.दाती के पाली में आलावास गांव स्थित आश्वासन बाल ग्राम संस्थान में 18 जून को राज्य महिला आयोग की टीम ने निरीक्षण किया था। आयोग ने जो रिपोर्ट तैयार की उसमें खामियों को बिंदुवार दर्शाया गया है। अवकाश के दिनों में लड़कियों को आश्रम के हॉस्टल से ले जाने वालों और वापस छोड़ने आने वालों के नाम-पते गलत होते थे। निरीक्षण में पता चला है कि आश्रम में स्कूल और कॉलेज का नियमानुसार संचालन नहीं हो रहा है।

2. निरीक्षण रिपोर्ट में उल्लेख है कि कई लड़कियों के तो एडमिशन फार्म में ही अभिभावकों और संरक्षकों के नाम-पते गलत दर्ज मिले। ऐसे में यह भी पता नहीं चल पाया है कि ये बच्चियां कहां से लाई गईं? कब लाई गईं?

3.आश्रम में जिस दिन निरीक्षण हुआ, 80 अनाथ बच्चियां मिलीं। इनमें ज्यादातर उदयपुर के कोटड़ा से लाई गई थीं। आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने हैरानी जताते हुए बताया : इन बच्चियों को लेकर आश्रम में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

4.आश्रम परिसर में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल और एक कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। टीम को छात्राओं की संख्या153 बताई गई, जबकि गिनती में 253 छात्राएं मिली हैं। इन छात्राओं के नाम-पते आधे-अधूरे मिले। शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग की ओर से तय मानदंडों का कोई पालन होता नहीं मिला। हद तो यह हो गई कि स्कूल-कॉलेज में एनरोलमेंट के रिकॉर्ड का भी रख-रखाव नहीं मिला। सरकार की ओर से स्कूल और कॉलेजों के लिए जो रजिस्टर तय किए गए हैं, वो भी आयोग की टीम ने मांगे तो आश्रम के पास नहीं थे।