जोधपुर:पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज व कल जोधपुर में बैठ कार्यकर्ताओं से फीड बैक लेंगे तो उनके जेहन में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि मारवाड़ में ढह चुके कांग्रेस के गढ़ को नए सिरे से कैसे खड़ा किया जाए। प्रत्याशी चयन में गहलोत का पूरा फोकस इसी पर केन्द्रित रहेगा।

आजादी के पश्चात कई बरस तक मारवाड़ कांग्रेस का गढ़ बना रहा, लेकिन भैरोसिंह शेखावत ने लगातार प्रयास कर कांग्रेस के इस गढ़ में सेंध लगाना शुरू कर दिया था। शेखावत के बरसों तक लगातार प्रयास का ही नतीजा रहा कि मारवाड़ के लोगों ने भाजपा को अपना लिया।

मारवाड़ की राजनीति पर मजबूत पकड़ रखने वाले गहलोत को यहां की प्रत्येक सीट के समीकरण अच्छी तरह से पता है। प्रत्येक क्षेत्र में उनके समर्थक बड़ी संख्या में मौजूद है। ऐसे में वे अपने इन समर्थकों की नब्ज टटोल थाह लेंगे कि किसे प्रत्याशी बनाया जाए। हालांकि अधिकांश सीट पर गहलोत पहले से नाम तय कर चुके है, लेकिन कुछ सीट अभी तक उनके लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।

इन सीटों पर प्रत्याशी चयन करने में गहलोत को भी पसीना आ रहा है। कुछ स्थान पर गहलोत की सूची में शामिल भावी प्रत्याशी दो चुनाव हारने के कारण एन वक्त पर दौड़ से बाहर हो गए। ऐसे स्थान पर अब नए प्रत्याशी का चयन करना है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने स्तर पर कराए सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर नए सिरे से प्रत्याशी चयन लिस्ट तैयार करने का आदेश दिया है। ऐसे में गहलोत के लिए प्रत्याशी चयन की राह इतनी आसान नहीं होगी,

मारवाड़ में कुल 43 सीट है। इस क्षेत्र की राजनीति में हमेशा से जाटों व राजपूतों का दबदबा रहता आया है। वर्ष 1998 में यहां से कांग्रेस को 35 तो भाजपा को आठ सीट पर जीत हासिल हुई। वर्ष 2003 में भाजपा ने 32 सीट पर जीत हासिल कर राज्य में सरकार बनाई।

जबकि वर्ष 2008 में मारवाड़ के लोगों ने कांग्रेस व भाजपा को बराबर अवसर दिया और दोनों को बीस-बीस सीट हासिल हुई। जबकि तीन स्थान पर निर्दलीय विजयी रहे। वर्ष 2013 के चुनाव में मारवाड़ से भाजपा ने 39  सीट जीत कर कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया। अब कांग्रेस को अपने इस गढ़ को एक बार फिर से बचाने की चुनौती है।