जयपुर:राजस्थान में विधानसभा चुनाव का प्रचार आज अपने अंतिम पड़ाव पर था और ऐसे में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी रणनीति के तहत पार्टी की पूरी ताकत राजस्थान चुनाव में झोंक दी। आचार संहिता के तहत स्टार प्रचारक होने के नाते अमित शाह राजस्थान की सीमा से बाहर जरूर चले गए, लेकिन अब भी उनका फोकस अंतिम समय में अपने चुनावी मैनेजमेंट पर है।

शाह और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित करीब 25 केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के केंद्रीय नेताओं ने राजस्थान में बुधवार को भी चुनाव प्रचार के अंतिम दिन अपनी पार्टी के लिए धुंआधार प्रचार किया। अमित शाह की रणनीति के तहत सभी केंद्रीय मंत्री और बड़े नेताओं ने प्रचार के बाद अलग अलग जिलों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस को घेरा। इससे पहले मंगलवार को राजस्थान में मंडल स्तर पर आरएसएस पदाधिकारियों ने संघ के स्वयंसेवकों के साथ बैठक की। इन स्वयंसेवकों को निर्देश दिए गए हैं कि 7 दिसंबर को मतदान के दिन सुबह से अपने गली मोहल्ले और परिचित लोगों में वोटर को मतदान केंद्र पर लेकर जाएं।

बीजेपी ने भी संगठन स्तर पर जिला अध्यक्षों को निर्देश दिया है कि जिले के सभी बूथ पर इंचार्ज की कोऑर्डिनेशन टीम के संपर्क में रहें। सभी उम्मीदवार अपनी विधानसभा के प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ विधानसभा के सभी बूथ इंचार्ज और पन्ना प्रमुखों के साथ 6 दिसंबर को बैठक करें। बूथ इंचार्ज और पन्ना प्रमुख किसी भी प्रकार की समस्या बताते हैं तो उसका समाधान तुरंत किया जाए।

अमित शाह की चुनाव जीतने की रणनीति में चुनावी अर्थमैटिक के साथ-साथ चुनावी केमिस्ट्री का भी रोल रहता है। इसलिए अमित शाह ने अपने अर्थमैटिक से पहले पार्टी की बिगड़ी हुई केमिस्ट्री को सुधारने के लिए नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें चुनाव में जिम्मेदारी देकर उनकी नाराजगी को दूर करने काम किया। अमित शाह चुनावी रणनीति के माहिर खिलाड़ी हैं, वो अच्छी तरह जानते हैं कि अपने नाराज कार्यकर्ताओं को कैसे मनाया जाता है। पीठ थपथपाने के साथ उन्हें चुनाव में जिम्मेदारी देकर उनके महत्व को बरकरार रखना उन्हें आता है।

चुनाव प्रचार का शोर थमने के पहले अमित शाह ने अजमेर में रोड शो कर शक्ति प्रदर्शन किया, जिसमें भारी भीड़ उमड़ी। इससे पहले उन्होंने जयपुर में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया। पत्रकारों के हर तरह के सवालों के बेबाक जवाब देते हुए शाह ने अपने चुनावी अभियान का पूरा लेखा-जोखा मीडिया के सामने रखा। शाह ने दावा किया कि एक बार फिर पूर्ण बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी की सरकार राजस्थान में बनने जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस तुष्टीकरण की राजनीति को बढ़ावा दे रही है।

2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद जितने भी विधानसभा चुनाव हुए, वहां बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। वहीं अगस्ता-वेस्टलैंड मुद्दे पर शाह ने कहा कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है। इसलिए क्रिश्चियन मिशेल के मुद्दे पर बोल रहे हैं। क्या विपक्ष बिचौलिये को बचाना चाहता है? प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में अच्छे प्रदर्शन के साथ ही 2019 में भी पूर्ण बहुमत से मोदी सरकार बनेगी।

चुनाव रणनीति और मैनेजमेंट से जीता जाता है। चुनाव जीतने का लंबा अनुभव है अमित शाह के पास। इसलिए चुनावी अभियान शुरू करने के साथ ही शाह ने रणनीति और मैनेजमेंट पर पूरा ध्यान दिया। बूथ जीतो, चुनाव जीतो का मूलमंत्र नेताओं और कार्यकर्ताओं के कान में फूंका। अंतिम क्षणों तक रणनीति और मैनेजमेंज की देखरेख में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। अब प्रचार का शोर थमने के बाद भी राजस्थान की सीमा से बाहर बैठे-बैठे साइलेंटली चुनाव कार्य संचालन का करिश्माई अंदाज दिखाने को शाह ने कमर कस ली है।