जयपुर.प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक ऑपरेशन थियेटर के स्टोर में बुधवार सुबह 5 बजे अचानक आग लग गई। पास ही आईसीयू था, जिसमें 12 मरीज थे। बगल में ही दो ऑपरेशन थियेटर भी थे। देखते ही देखते स्टोर से आग बढ़ती हुईऑपरेशन थियेटर और पास के ही दो अन्य कमरों तक पहुंच गई। आईसीयू में धुआं भर गया। लोग मरीजों को आनन-फानन में कंधों पर उठाकर दौड़ पड़े। गनीमत रही कि समय रहते मरीजों को निकाल लिया गया। जब तक आग पर काबू पाया गया, तब तक दोनों ऑपरेशन थियेटर और वहां की सभी लाइनें, इलेक्ट्रिक लाइन, कम्प्यूटर और अन्य सामान खाक हो गया। अब यहां कम से कम 25 दिन ऑपरेशन नहीं हो सकेंगे।

आईसीयू के मरीज ट्रॉली-कंधों पर निकाले

- आईसीयू में सिर्फ बीप-बीप की आवाज थी। स्टाफ भी करीब 3 बजे चैक करके गया था और घरवाले भी नींद के आगोश में थे। अचानक पूरी आईसीयू में धुएं का गुब्बार छा गया। स्टाफ और परिजनों में भगदड़ मच गई। सब बाहर की तरफ दौड़े। परिजन कुछ समझ पाते, इससे सुनाई दिया - आग लग गई है, दूसरी जगह चलो जल्दी। सीने पर पट्टियां और वेंटीलेटर पर मौजूद मरीजों को भी जल्दी से बाहर निकाला गया।

- आनन-फानन में सारे मरीजों को सेमी आईसीयू में शिफ्ट किया। कई मरीज तो ऐसे थे, जिनका मंगलवार को ही ऑपरेशन हुआ था और बुधवार सुबह अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक ऑपरेशन थियेटर के स्टोर में आग लगने के बाद उन्हें शिफ्ट किया गया।

- आग इतनी भीषण थी कि देखते-देखते स्टोर से ऑपरेशन थियेटर तक पहुंच गई। गनीमत रही कि समय रहते सारे मरीज बाहर निकाल लिए गए। जरा भी देर होने पर बड़ी अनहोनी हो सकती थी।

सेमी आईसीयू में मरीजों को खतरा
12 मरीजों को सेमी आईसीयू में शिफ्ट किया। बुधवार दोपहर तक भी यहां वेंटीलेटर और अन्य चिकित्सीय सुविधाओं का इंतजाम किया जाता रहा। चाहते तो इन्हें किसी अन्य अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया जा सकता था। क्योंकि इमरजेंसी में ऐसा किया जाता है। इनमें से 7 मरीजाें की मंगलवार को ही कार्डियो सर्जरी हुई है। यह पूरा खुला हुआ है और इंफेक्शन का खतरा बढ़ गया है।

हादसे की वजह

पीडब्ल्यूडी के इलेक्ट्रिक इंजीनियर पीसी मीणा ने बताया कि स्टोर में ईटीओ मशीन रखी हुई थी। संभव है कि या तो वह ऑन रह गई और हीट की वजह से घटना हुई। या फिर संभव है कि यहीं का कोई प्लग ऑन रह गया और सर्किट की वजह से आग लग गई।


अब 25 दिन नहीं होंगे ऑपरेशन

थियेटर में 2 ओटी टेबल रनिंग में है। रोजाना 4 से 5 ऑपरेशन होते हैं। लेकिन जिस तरह की आग लगी है, उसे देखते हुए कम से कम 25 दिन ऑपरेशन नहीं हो सकेंगे। अस्पताल के इलेक्ट्रिक इंजीनियर बीएस गुप्ता ने बताया कि बुधवार को भी 4 ऑपरेशन होने थे, लेकिन नहीं हो सके। आग से पूरा ही ओटी और लाइट सिस्टम खराब हो चुका है। रिनोवेशन के बाद फ्यूमिनिकेशन होगा और उसके बाद ही ऑपरेशन शुरू हो सकेंगे।

सिर्फ 60 लाख रु. के लिए सैकड़ों मरीजों की जान आफत में
अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम के लिए तीन साल पहले 60 लाख रु. की जरूरत बताई गई थी, लेकिन आज तक सिस्टम नहीं लग पाया। स्मोक सेंसर भी नहीं हैं। यदि स्मोक सेंसर होते तो आग लगने का तुरंत पता चल जाता। लेकिन अस्पताल में कहीं भी सेंसर नहीं हैं। वहीं आग की वजह से अस्पताल में कम से कम 25 लाख रुपए का तो नुकसान हो चुका है।

एसएमएस अस्पतालअधीक्षक डॉ. डीएस मीणा के मुताबिक, सुबह जैसे ही आग की सूचना मिली, मौके पर पहुंच गए थे। बड़ी घटना है, लेकिन मरीजों को बचा पाने में कामयाब हुए हैं। ऐसी घटना दोबारा नहीं हो, इसके पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। जो भी जरूरत होगी, उसे लगाया जाएगा।