जयपुर:राजनीति में कुछ भी स्थाई नहीं होता। न मुद्दे, न नेता और न ही पार्टी के आदेश। समय, काल व परिस्थिति के अनुसार बदलते रहते हैं। बस पार्टी को फायदा मिलना चाहिए, राजनीतिक हित सधने चाहिए और यही कारण है कि पिछले काफी समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित होने वाले नेताओं को तीन महीने के भीतर ही पार्टी में फिर से स्वागत शुरू हो जाता है। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस, स्थिति दोनों तरफ एक जैसी ही है। लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही कांग्रेस ने बागियों की घर में वापसी शुरू भी कर दी है। खास रिपोर्ट:

अनुशासनहीनता के नाम पर नेताओं व कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की मुनादी करने वाली कांग्रेस अब ढोल पीट पीटकर इन निष्कासितों का पार्टी में फिर से स्वागत कर रही है। कांग्रेस ने पहला आदेश जारी भी कर दिया है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट के निर्देशा पर राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 के दौरान विधानसभा क्षेत्र बस्सी एवं महुआ के कांग्रेसजनों द्वारा पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण पार्टी से किए गए निष्कासन को रद्द कर उन्हें पुन: पार्टी में शामिल किया गया है। 

संगठन महासचिव महेश शर्मा ने बताया कि विधानसभा क्षेत्र महुआ से पूर्व जिला प्रमुख जीत सिंह, विधानसभा क्षेत्र बस्सी से पंचायत समिति बस्सी के प्रधान गणेश नारायण शर्मा, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी तूंगा के अध्यक्ष  सुरेन्द्र सिंह राजावत,  जिला परिषद् जयपुर के सदस्य बेनीप्रसाद कटारिया, असंगठित कामगार कांग्रेस के प्रदेश महासचिव रामस्वरूप मीना, प्रकाश महावर तथा सुधीर शर्मा के विधानसभा चुनाव-2018 के दौरान किए गए निष्कासन को रद्द कर पुन: पार्टी में शामिल किया गया है। कारण साफ है, लोकसभा चुनाव में जीत के लिए पार्टी को अब इन नेताओं की जरूरत पड़ गई है। उम्मीदवारों ने भी निष्कासन रद्द करने की सिफारिश की है।

विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने दर्जनों कांग्रेसियों को बाहर का रास्ता दिखाया था, इनमें पूर्व विधायक व मंत्री भी थे। एक ही सूची में पार्टी ने 28 बागी उम्मीदवारों का निष्कासन किया था। इनमें खंडेला से महादेव सिंह खंडेला, सिरोही से संयम लोढ़ा, केशोरायपाटन से सीएल प्रेमी, नीमकाथाना से रमेश खंडेलवाल, शाहपुरा से आलोक बेनीवाल, दूदू से बाबूलाल नागर, किशनगढ़ से नाथूराम सिनोदिया, बस्सी से लक्ष्मण मीणा, गंगापुर से रामकेश मीणा,  तारानगर से सीएस बैद,  लाडनू से जगन्नाथ बुरड़क, सादुल शहर से ओम बिश्नोई, गंगानगर से राजकुमार गौड़, करणपुर से पृथ्वीपाल सिंह संधू, रायसिंहनगर से सोहन नायक, रतनगढ़ से पूसाराम गोदारा, सुजानगढ़ से संतोष मेघवाल, किशनगढ़बास से दीपचंद खेड़िया, कठूमर से रमेश खींची, महुवा से अजीतसिंह महुवा,  बामनवास से ननवलकिशोर मीणा, जैतारण से राजेश कुमावत, पाली से भीमराज भाटी, मारवाड़ जंक्शन से खुशवीर सिंह जोजावर, जैसलमेर से सुनीता भाटी, आहोर से जगदीश चौधरी,  सलूम्बर से रेशमा मीणा व  शाहपुरा से गोपाल केसावत का छह साल के लिए निष्कासन हुआ था। इनके अलावा गंगानगर से जयदीप बिहाणी, बीकानेर पूर्व से गोपाल गहलोत, टोडाभीम से शिवदयाल मीणा, ओसियां से महेंद्र सिंह भाटी, बिलाड़ा से विजेंद्र झाला, भीलवाड़ा से ओम नाराणीवाल और शाहपुरा से राजकुमार बैरवा भी निष्कासित किए गए, लेकिन समय बदला और कुछ चुनाव जीत गए। खंडेला से महादेव सिंह खंडेला, सिरोही से संयम लोढ़ा व बस्सी से लक्ष्मण मीणा, श्रीगंगानगर से राजकुमार गौड़, दूदू से बाबूलाल नागर व गंगापुर से रामकेश विधायक बन गए। 

अब खास बात यह है कि इन नेताओं को पार्टी से निष्कासित गया था छह साल के लिए, लेकिन तीन महीने के भीतर ये राहुल गांधी के साथ मंच पर नजर आ गए। सरकार को समर्थन दे रहे हैं। उम्मीदवारों के साथ मंच पर बैठ रहे हैं। हालांकि नियमों के हवाले के कारण ये फिलहाल पार्टी में तो फिर से शामिल नहीं हो सकते, लेकिन कांग्रेस ने इनको गले जरूर लगा लिया है। अब देखना यह है कि तीन महीने पहले पार्टी में बागी बनने वाले नेता अब कांग्रेस की बगियां में कितनी खिलावट लाते हैं।