जयपुर, स्वायत्त शासन एवं नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि चौमूं नगरपालिका क्षेत्र में सीवर लाइन परियोजना की क्रियान्विति के दौरान होने वाली क्षति की पूर्ति परियोजना की कार्यकारी एजेन्सी द्वारा ही कराई जाएगी। कृपलानी ने प्रश्नकाल के दौरान इस संबंध में उठे मुद्दे के पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा कि राजस्थान शहरी आधारभूत विकास परियोजना (आरयूआईडीपी) के तृतीय चरण की परियोजनाओं के पर्यवेक्षण के लिए प्रत्येक जिले में सिटी लेवल मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया गया है। चतुर्थ चरण की परियोजना के लिए भी सिटी लेवल मॉनिटरिंग कमेटी का गठन भी किया जा रहा है। इस समिति में सम्बन्धित विधायक भी सम्मिलित है।

कृपलानी ने बताया कि सीवरेज सिस्टम को कवर करने के लिए कम से कम पेयजल उपलब्धता 135 एलपीसीडी होनी चाहिए, जो कि अभी चौमूं शहर में 70 एलपीसीडी है। जेडीए द्वारा भी पेयजल के लिए लगभग 40 करोड़ रुपए की योजना बनाकर क्रियान्विति की गई है, परन्तु ट्यूबवेलों से पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने पर योजना से अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं हो पाई। कृपलानी ने बताया कि केन्द्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसार जहां पर भूमिगत सीवर सिस्टम फिजीबल नहीं है, वहां पर फिकल स्लज सेप्टेज मैनेजमेन्ट (एफएसएसएम) सिस्टम लिया जा सकता है, जिसमें पानी की कम आवश्यकता होती है। इसके ट्रीटमेन्ट पश्चात पैरामीटर सीवरेज सिस्टम के बराबर होती है।

कृपलानी ने बताया कि डीपीआर तैयार हो जाने के पश्चात् उसका अनुमोदन सिटी लेवल मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा ही किया जाएगा। इसलिए डीपीआर में गलत तथ्य अथवा अधूरे तथ्यों का समावेश होने की सम्भावना नहीं है। परियोजना अनुमोदन की कार्यवाही को पूर्णतः पारदर्शी बनाए जाने के लिए समिति के समक्ष डीपीआर प्रस्तुत की जायेगी। समिति के निर्णयानुसार ही क्रियान्विति की जायेगी। इससे पहले कृपलानी ने विधायक रामलाल शर्मा के मूल प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि राजस्थान शहरी आधारभूत विकास परियोजना (आरयूआईडीपी) के चतुर्थ चरण के अन्तर्गत नगरपालिका, चौमूं द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाई जा रही है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट मार्च, 2018 तक बनना संभावित है। इस योजना की संभावित राशि 183 करोड़ है। योजना पर एडीबी से स्वीकृति उपरान्त निविदा आमंत्रित किया जाना प्रस्तावित है।