जयपुर, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने प्रदेश में महिला उत्पीड़न के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई है। पायलट ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की दुर्दशा के पीछे सरकार द्वारा महिला उत्थान व सुरक्षा से जुड़े मामलों की अनदेखी मुख्य रूप से जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि भरतपुर जिले में दुष्कर्म पीड़ित एक नाबालिग बच्ची को न्याय नहीं मिलने से उसके द्वारा व्यथित होकर सरकार से इच्छा मृत्यु की मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार श्रीगंगानगर व जयपुर में युवतियों के साथ छेड़छाड़ व अगवा करने की घटनाओं को दिनदहाड़े अंजाम दिया गया है, जिससे साफ पता चलता है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था की लचरता के कारण महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कल ही राजस्थान विधानसभा में 12 वर्ष तक की आयु की बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामलों में मृत्युदण्ड का प्रावधान किया गया है और गत दिनों प्रधानमंत्री ने झुंझुनूं जिले में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ मुहिम के तहत राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत की है, जबकि सच्चाई यह है कि जेंडर बजटिंग के मामले में प्रदेश में कई अनियमितताएं कैग रिपोर्ट में सामने आई हैं।

उन्होंने कहा कि कैग रिपोर्ट के अनुसार कई मदों में आवंटित राशि का मात्र 0.37 प्रतिशत ही खर्च किया गया है। वर्ष 2012-13 में जेंडर बजटिंग के तहत आवंटित राशि का लगभग 80 प्रतिशत खर्च किया गया था। उसके विपरीत भाजपा के राज में वर्ष 2016-17 में 60 प्रतिशत के आसपास ही खर्च किया गया है। कैग रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश योजनाओं में 0.37 प्रतिशत से 27 प्रतिशत तक ही खर्च हुआ है, जिससे साफ पता चलता है कि सरकार की प्राथमिकता में महिला सुरक्षा व सशक्तीकरण बिल्कुल नहीं है।