नई दिल्ली: सैंक्शन लोड से अधिक बिजली खर्च करने पर बिजली उपभोक्ताओं को जुर्माना देना पड़ेगा। यह प्रावधान केंद्र सरकार लाने जा रही है। बिजली राज्य का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार के इस नियम को राज्यों के नियामक आयोग फॉलो करेंगे। बिजली की खुदरा दरों (रेट) को आसान करने के लिए केंद्र सरकार बिजली कानून में संशोधन करने जा रही है। नए नियम में घरेलू (डोमेस्टिक), कमर्शियल एवं इंडस्ट्रीयल के लिए एक प्रकार की दरें होंगी। अभी सबके लिए बिजली की अलग-अलग दरें लागू होती हैं। डोमेस्टिक के मुकाबले कमर्शियल व इंडस्ट्रीयल की दरें अधिक होती हैं। केंद्र सरकार का मानना है कि उपभोक्ता जानबूझ कर अपना लोड कम सैंक्शन कराते हैं। ऐसे में खपत के मुताबिक औसत लोड देखा जाएगा और उससे अधिक की खपत करने पर उपभोक्ताओं को जुर्माना देना पड़ सकता है। हालांकि जुर्माने की राशि अभी तय नहीं की गई है।

बिजली की दरें उपभोक्ताओं की श्रेणी से नहीं, खर्च के हिसाब से

नए नियम में बिजली की दरें उपभोक्ताओं की श्रेणी के आधार पर तय नहीं होंगी। मतलब डोमेस्टिक, कमर्शियल और इंडस्ट्रीयल श्रेणी के लिए अलग-अलग दरें नहीं होंगी। बिजली की दरें अब लोड और उपभोक्ताओं की खपत के मुताबिक होगी। बिजली की दरें तय करने के लिए पांच प्रकार की श्रेणी होगी। पहली श्रेणी 0-2 किलोवाट वाले उपभोक्ताओं की होगी। दूसरी श्रेणी में 2-5 किलोवाट, तीसरी में 5-10  किलोवाट, चौथी में 10-25 तो पांचवी में 25 किलोवाट से अधिक लोड वाले उपभोक्ता होंगे। बिजली मंत्रालय का मानना है कि बिजली एक कमोडिटी है, इसलिए इसकी दरें खपत के हिसाब से तय होनी चाहिए।

स्लैब के अधार पर सब्सिडी का प्रावधान

बिजली मंत्रालय के प्रावधान के मुताबिक राज्य सरकार स्लैब के आधार पर अपने उपभोक्ताओं को सब्सिडी दे सकती है। अभी भी कई राज्यों में कम स्लैब मतलब एक निर्धारित यूनिट खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को राज्य सरकार सब्सिडी देती है। बिजली मंत्रालय के मुताबिक सरकार एक देश के लिए एक बिजली की दरें करने के पक्ष में है। लेकिन बिजली राज्य का विषय होने की वजह से ऐसा मुमकिन नहीं है, लेकिन सभी राज्यों के विद्युत नियामक आयोग के लिए एक प्रकार के नियम बनाकर सरकार इस दिशा में आगे बढ़ सकती है। हालांकि केंद्र के नियम को मानना या नहीं मानना, राज्य सरकार पर निर्भर करता है।