नई दिल्ली:पूर्वी लद्दाख (Northern Ladakh) में वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control) के साथ विस्थापन और डी-एस्केलेशन के लिए भारत और चीन (India-China) इस सप्ताह कोर कमांडर वार्ता स्तर की आठवें दौर की बैठक कर सकते हैं. सरकारी सूत्रों ने एएनआई के हवाले से कहा, "इस सप्ताह आठवें दौर की वार्ता होने की संभावना है, जिसके लिए दोनों पक्षों के बीच तारीखों पर काम किया जा रहा है." वार्ता का यह दौर महत्वपूर्ण होने की संभावना है क्योंकि दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में सभी टकराव बिंदुओं से पीछे हटने और डी-एस्केलेशन पर चर्चा शुरू कर दी है, जिसमें उत्तरी और दक्षिणी बैंक पंगोंग झील (South Bank Pangong Lake) के साथ-साथ अन्य बिंदु भी शामिल हैं जहां से पूरी तरह से विघटन होना बाकी था.

आठवें दौर की वार्ता में, भारतीय पक्ष की अगुवाई नए 14 कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन करेंगे, जिन्होंने हाल ही में लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह से पदभार संभाला था. सिंह को अब भारतीय सैन्य अकादमी (Indian Military Academy) में स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां वह सेना के अधिकारियों की भावी पीढ़ियों को प्रशिक्षित करने के प्रभारी होंगे. चार महीने से अधिक समय तक गतिरोध में रहने के बाद, भारत ने चीनी और पूर्ववर्ती पैंगोंग झील के दक्षिणी और उत्तरी दोनों किनारों पर वर्चस्व की ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया है.
 

सकारात्मक रही थी सातवें दौर की वार्ता
इससे पहले 12 अक्टूबर को सातवें दौर की वार्ता के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के टकराव वाले बिंदुओं से सैनिकों की वापसी में कोई सफलता नहीं मिली है. दोनों पक्षों ने कहा था कि सातवें दौर की बातचीत ‘सकारात्मक और फलदायक’ रही.

सातवें दौर की वार्ता के एक दिन बाद दोनों देशों की सेनाओं ने संयुक्त प्रेस बयान में कहा था, ‘‘दोनों पक्षों ने सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से संवाद और संचार बनाए रखने और जल्द से जल्द सैनिकों की वापसी के लिए पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने को लेकर सहमति जतायी.’’

गत 29 और 30 अगस्त की दरम्यानी रात को इलाके में पीएलए के सैनिकों द्वारा भारतीय सैनिकों को डराने-धमकाने की कोशिश के बाद भारतीय सैनिकों ने पैंगोंग झील के दक्षिणी तट के आसपास स्थित मुखपारी, रेजांग ला और मगर पहाड़ी इलाकों में नियंत्रण हासिल कर लिया था.

गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख (Northern Ladakh) की गलवान घाटी (Galwan Valley) में 15 जून को चीनी सैनिकों (Chinese Troops) के साथ लड़ाई में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे. इस घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को काफी बढ़ा दिया था. चीन ने लड़ाई में मारे गए और जख्मी हुए अपने सैनिकों की संख्या का अब तक खुलासा नहीं किया है. भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, चीनी सैनिक बड़ी संख्या में हताहत हुए थे.