नई दिल्ली, संसद में आज प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा में जीन संवर्धित (जीएम) फसलों को अपनाने और फसलों की बुवाई से काफी पहले उनके व्यापार संबंधी नीति पर फैसला करने तथा किसानों की आय बढ़ाने की राह की सभी बाधाओं को दूर करने पर बल दिया गया है। इसमें कहा गया है कि समावेशी विकास के लिए लघु एवं सीमांत किसानों को समय से उचित दर पर बैंक कर्ज सुलभ कराने और क्षेत्रीय विषमताओं को दूर करने पर ध्यान देने की जरूरत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिंचिंत भूमि क्षेत्र को बढ़ाना, बेहतर विपणन ढांचा और डेयरी क्षेत्र में संलग्न महिलाओं के लिए धन की व्यवस्था पर ध्यान केन्द्रित किये जाने की आवश्यकता है।

कृषि कार्य में उत्पादन, विपणन और कीमत से संबंधित विभिन्न प्रकार के जोखिमों को कम किए जाने पर भी बल दिया गया है। संसद में पेश किये गये वर्ष 2016-17 की इस दूसरी समीक्षा में कहा गया है, कृषि कार्य की बाधाओं को उपयुक्त नीतिगत पहल की आवश्यकता है। वर्ष 2017 में कमी के बजाय अधिशेष उत्पादन की स्थिति के बीच कृषि आय को बढ़ाने के लिए जिंसों की कीमतों को बेहतर करने की जरूरत को देखते हुए वर्ष पिछले अनुभवों से सीखना अनिवार्य है। इसमें कहा गया है कि किसानों को विभिन्न कृषि जोखिमों का प्रबंधन करने और उसे कम करने में मदद करते हुए कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाउ बनाने के लिए सही नीतिगत पहल की आवश्यकता है।

इसमें कहा गया है कि अधिक उपज देने वाली बीज की किस्मों एचवाईवी और जीन संवर्धित जीएम बीजों का उपयोग उन उपायों में से है जो कृषि कार्य के जोखिमों को कम कर सकते हैं। इसमें कहा गया है कि ये मामले विवादों में अटके पड़े हैं और इन्हें सुलझाये जाने की आवश्यकता है। इसमें कहा गया है, अधिक उपज देने वाली बीज की किस्मों एचवाईवी और जीन संवर्धित जीएम बीजों को लेकर विवादों को हल किए जाने की आवश्यकता है और इसका विस्तार न केवल सरसों तक हो बल्कि सभी फसलों तक होना चाहिए।