जयपुर: राजस्थान विधानसभा में बजट पर बहस के दौरान भूत प्रेत की गूंज सुनाई दी. इसकी शुरुआत बजट बहस के दौरान मंत्रियों की सदन से गैर मौजूदगी से हुई. उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने सदन में मंत्रियों की गैर मौजूदगी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हम यहां किसे सुनाने बैठे हैं, सदन में मंत्री ही नहीं है. इसी दौरान दो तीन मंत्री सदन में आ गए. उपमुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी ने आपत्ति की और कहा तीन तीन मंत्री सदन में बैठे हैं और आप कह रहे हैं कोई मंत्री नहीं है. इसी बीच भाजपा के दो विधायक अपनी सीटों से उठकर दूसरी जगह चले गए. सभापति राजेंद्र पारीक ने मजाकिया लहजे में उपनेता प्रतिपक्ष से कहा, आपके दो विधायकों की सीट के नीचे आखिर ऐसा क्या है कि ये सीट पर टिकते ही नहीं है. बार-बार दूसरी सीटों पर जाकर बैठ जाते हैं.

इस पर उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा, सभापति जी, जब विधानसभा भवन बना था, तब कहा जाता था कि यहां भूत प्रेत रहते हैं, शायद यह उसी का प्रभाव है. बता दें कि, बुधवार को ही राजस्थान विधानसभा में विधायकों की कम संख्या को देखते हुए विपक्ष ने राजस्थान विनियोग विधेयक पर मत विभाजन की मांग कर डाली. सभापति के इस मांग को ठुकराए जाने पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ और भाजपा विधायकों ने बायकाट कर अपना विरोध जताया. हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल का दावा था कि सदन में कांग्रेस के विधायकों की संख्या भाजपा के विधायकों की संख्या से दोगुनी थी. विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विधायकों का सदन से बाहर रहना आज सरकार को महंगा पड़ जाता लेकिन सभापति के फैसले के कारण संकट टल गया.

दरअसल, राजस्थान विनियोग विधेयक को पारित करते समय विपक्ष ने मत विभाजन की मांग कर ली. उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि यह वित्त विधेयक है और सदन में सरकार अल्पमत में आ गई है इसलिए इसको भंग किया जाए. राठौर ने सदन में चिल्लाते हुए कहा कि सदन के सभी दरवाजे तुरंत बंद कराया जाए और विधायकों की संख्या कि नहीं जाए. आसन पर मौजूद सभापति राजेंद्र पारीक भी कुछ देर के लिए असहज नजर आए और वह विधेयक को पारित कराने के लिए बार-बार हां और ना बुलाते रहे. इसी बीच कांग्रेसी विधायकों में अफरा-तफरी नजर आई और वे विधानसभा के कमरों से भागकर सदन में पहुंचे.

इस बीच संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने सत्ता पक्ष की तरफ से मोर्चा संभाला उन्होंने कहा कि सदन में हमारे विधायकों की संख्या विपक्ष के विधायकों की संख्या से दोगुनी है और चाहे तो वोटिंग करा लें. इस बीच भाजपा की विधायक वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करते हुए मत विभाजन की मांग करते रहे. लेकिन सभापति राजेंद्र पारीक ने उनकी मांग नहीं मानी. इसी बीच शांति धारीवाल ने फिर कहा कि भाजपा के विधायक मुट्ठी भर है

और फिलहाल इनकी संख्या 28 है. हमारे कांग्रेस के विधायक 56 मौजूद है. धारीवाल ने यह भी टिप्पणी की कि भाजपा के कैलाश मेघवाल भी हमारे साथ है. इस बीच सभापति ने ध्वनिमत से विधायक को पारित करा दिया तो भाजपा के विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सदन से बायकॉट कर दिया.