इंटरनेट डेस्क, भगवान विष्णु को सात बार अवतार लेना पड़ा, इसका एक कारण मानव जाति का कल्याण करना तो था ही इसके साथ ही इन अवतारों के पीछे भगवान विष्णु को दिए गए श्राप भी हैं, इस श्राप के कारण भगवान को सात बार अवतार लेना पड़ा। आप ये जरूर जानना चाहेंगे कि आखिर भगवान विष्णु को श्राप किसने दिया तो आइए आपको बताते हैं इसके बारे में .......

हरवंश पुराण में उल्लेखित एक कथा के अनुसार एक बार दानव गुरु शुक्र भगवान शिव के पास कैलाश पर्वत पर गए तथा उनसे दानवों को देवताओं से सुरक्षित रखने का उपाय पूछा, शिव शुक्र से बोले की तप ही एक मात्र ऐसा साधन है जिसके प्रभाव से तुम दानवों को देवताओ से सुरक्षित रख सकते हो। भगवान शिव के आज्ञा से शुक्र तप करने चले गए तथा कई वर्षों तक उन्होंने घोर तप किया। जब शुक्र तप में लीन थे उस समय देवताआें और असुरों के मध्य बहुत भयंकर युद्ध हुआ व इस युद्ध में भगवान विष्णु ने शुक्र की माता का वध कर दिया। जब शुक्र का तप पूरा हुआ तो उन्हें वरदान स्वरूप मृत संजीवनी की दीक्षा प्राप्त हुई, इस शक्ति के प्रभाव से वे मृत व्यक्ति को पुनः जीवित कर सकते थे।

तपस्या के बाद वापस अपने आश्रम में लौटने पर जब उन्होंने देखा की उनकी माता मृत पड़ी है तो वे क्रोधित हो गए। उन्होंने तपो बल के प्रभाव से यह जान लिया की उनकी माता की मृत्यु का कारण भगवान विष्णु हैं। उन्होंने क्रोध में आकर भगवान विष्णु को श्राप देते हुए कहा की विष्णु तुम्हें सात बार पृथ्वी में जन्म लेकर मृत्यु को प्राप्त होना पड़ेगा। इसके बाद उन्होंने मृत संजीवनी मंत्र से अपनी माता सहित सभी देत्यों को पुनः जीवित कर दिया और स्वर्ग में आक्रमण की तैयारी करने लगे। शुक्र द्वारा दिया गया श्राप भगवान विष्णु के लिए वरदान सिद्ध हुआ और दानवों के लिए श्राप, क्यांकि भगवान विष्णु ने सात बार पृथ्वी में मानव रूप में जन्म लेकर दानवों का संहार किया।