जोधपुर: डालीबाई मंदिर के पास एक कॉलोनी के पार्क में मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य को रुकवाने तथा वहां स्थापित मूर्तियां उखाड़ने की कार्रवाई डीसीपी वेस्ट मोनिका सेन के आदेश से हुई थी। उन्हीं के निर्देश पर एडीसीपी सरिता सिंह, एसीपी सिमरथाराम व बोरानाडा थाने के इंचार्ज मुकुट बिहारी वहां गए थे। जबकि वहां न तो कोई झगड़ा हो रहा था और न ही कोई विवाद व विरोध की स्थिति बनी हुई थी। फिर भी पुलिस ने महिलाओं से जबर्दस्ती कर मूर्तियां उखाड़ी।

डीसीपी ने ही कलेक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर को फोन कर जेडीए की टीम भी थाने बुलवाई और जमीन के कागजात मंगवाए थे। जबकि जेडीए की ओर से पार्क में बन रहे इस मंदिर को अवैध मानकर कभी कोई नोटिस नहीं दिया था। खुद जेडीए चेयरमैन प्रो. महेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि पुलिस ने जेडीए को जबर्दस्ती शामिल कर लिया, मामला कुछ था ही नहीं।

मामले के बारे में डीसीपी से बात करने का प्रयास भी किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इस घटना के बाद कॉलोनी व आस-पास के लोगों में पुलिस के प्रति रोष हो गया। गुरुवार को ये लोग कमिश्नर आलोक वशिष्ठ से मिले और पुलिस के तरीके की शिकायत की। कमिश्नर ने मामले की जांच एडीसीपी (महिला अपराध अनुसंधान प्रकोष्ठ) महेंद्रसिंह भाटी को सौंपी है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी करेंगे। 

मंदिर पुराना या नया, इजाजत ली थी? : साढ़े 4 साल से बना था छोटा मंदिर। फरवरी-17 में शिवरात्रि मनाई। मार्च-18 में होली दहन कार्यक्रम हुआ। इसी महीने कृष्ण जन्माष्टमी का आयोजन हुआ। जीर्णोद्धार की जेडीए से अनुमति नहीं ली। ऐसी अनुमति अक्सर कोई नहीं लेता।   

पुलिस काम रुकवाने क्यों गई? : पुलिस के पास कोई लिखित शिकायत नहीं थी। थानाधिकारी ने लोगों व मीडिया को यही बताया। डीसीपी का कहना था कि किसी का फोन आया था तब पुलिस भेजी। बाद में जेडीए के अफसरों को भी थाने बुलाकर कागजात चैक किए।  

पुलिस ने मूर्तियां क्यों उखाड़ी? : पुलिस जबर्दस्ती काम रुकवाकर मूर्तियां हटाना चाहती थी। महिलाएं राधा-कृष्ण की मूर्तियों को घेरकर बैठ गई। महिलाओं को जबर्दस्ती हटाया और मूर्तियां उखाड़ ली। जबकि ऐसा नहीं था कि रातों-रात कोई मंदिर बन रहा था और मूर्तियां लगी थी।  

कार्रवाई सही या गलत?  : थानाधिकारी का बयान वही होगा जो उसने कहा कि- सौहार्द बिगड़ता इसलिए काम रुकवाया। सौहार्द कौन बिगाड़ता? वहां तो मंदिर का विरोध करने वाला कोई था ही नहीं। विरोध होता तब पुलिस को कोर्ट में इस्तगासा कर जमीन कुर्की की कार्रवाई करनी थी मूर्तियां नहीं उखाड़नी थी। महिलाएं मूर्तियां हटाने का विरोध कर रही थी तो उन्हें भी महिला कांस्टेबल की मदद से हटाते, पुरुष पुलिसकर्मियों की जबर्दस्ती से दो महिलाएं जख्मी हुई।  

जेडीए की क्या भूमिका होगी? : जेडीए पार्क में सामुदायिक भवन बनाता है। विधायक व सांसद कोष का पैसा भी लगता है। कॉलोनी के लोग सामुदायिक भवन की इजाजत ले सकते हैं, उसमें भवन के साथ ही मंदिर बना सकते हैं।