जयपुर: राजस्थान विद्युत नियामक आयोग (Rajasthan Electricity Regulatory Commission) की हरी झंडी के बाद अब डिस्कॉम्स ऑर्डर निकाल कर दरों में बढ़ोतरी पर मुहर लगा रहे हैं. विनियामक आयोग द्वारा विद्युत दरों में की गई वृद्धि में 4800 करोड़ रुपये की राजस्व आय होगी.

इसमें से 2469 करोड़ रुपये का भार राज्य सरकार वहन करेगी. इससे 20 लाख बीपीएल और 42 लाख छोटे घरेलू उपभोक्ताओं तथा 14 लाख किसानों की बिजली की दरों में कोई प्रभावी वृद्धि नहीं होगी. प्रदेश के कुल 133 लाख उपभोक्ताओं में से 76 लाख उपभोक्ता जो कि कुल उपभोक्ताओं का 57 प्रतिशत है, पर इस बढ़ोतरी का कोई असर नहीं पड़ेगा. हालांकि इस इजाफे के साथ ही प्रदेश सबसे महंगी बिजली देने वाले राज्यों में शामिल हो गया है.

डिस्कॉम्स ने भी बिजली दरें बढ़ा दी हैं
विद्युत नियामक आयोग से हरी झंडी मिलने के साथ ही डिस्कॉम्स ने भी बिजली दरें बढ़ा दी हैं. इससे घरेलू और छोटे व्यावसायिक उपभोक्ताओं का औसतन बिल 15 फीसदी बढ़ेगा. 50 यूनिट तक बिजली खपत वाले उपभोक्ताओं को अब हर माह आने वाले बिल में 25 रुपये बढ़े हुए स्थायी सेवा शुल्क के रूप में अधिक देने पड़ेंगे. 50 यूनिट तक बिजली खपत वाले बीपीएल उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई बिजली दरों से मुक्त रखा गया है. इसके अलावा राज्य में अजमेर, जयपुर और जोधपुर डिस्कॉम उपभोक्ताओं से कभी फ्यूल चार्ज तो कभी स्थाई शुल्क या फिर सरचार्ज के नाम पर नित नई वसूली करते रहते हैं. वर्तमान में उपभोक्ताओं से प्रतिमाह फ्यूल चार्ज 39 पैसे, स्थाई शुल्क 400 रुपये तक वसूल रहा है.

पड़ोसी राज्यों में 4 से 5 रुपये प्रति यूनिट ही है बिजली
इसी के साथ राजस्थान बिजली बढ़ोतरी के मामले में शीर्ष पायदान के राज्यों कायम है, जहां बिजली सबसे महंगी है. राजस्थान में ही प्रति वर्ष 21409 मेगावाट का उत्पादन होता है. यही नहीं, पड़ोसी राज्यों हरियाणा और पंजाब से तुलना की जाए तो राजस्थान में मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए 100 यूनिट पर 6.50 रुपये और 500 यूनिट के बाद यह दर 7.65 तक पहुंच जाती है. जबकि पड़ोसी राज्यों में यह महज 4 से 5 रुपये प्रति यूनिट ही है. उत्तरप्रदेश में 5.50 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली मिल रही है. बिजली उत्पादन में कोयले के अधिक इस्तेमाल से प्रदेश में बिजली महंगी मिल रही हैं, वहीं छीजत रोकने में विफलता भी बड़ा कारण हैं.

discoms increased electricity rates per unit from february in rajasthan

प्रदेश के उपभोक्ताओं को फिलहाल अडानी समूह के बकाया पैसे का भुगतान भी अपने बिजली बिलों के जरिए करना है. ऐसे में फरवरी माह में आने वाले बिजली के बिलों से लाखों उपभोक्ताओं के करंट लगना तय है.