जयपुर। शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि राजस्थान के पुस्तकालयों में उपलब्ध दुर्लभ साहित्य, प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों का डिजिटलाइजेशन कर हमेशा के लिए उन्हें संरक्षित करने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान के भंडार हैं, इनसे ही नई पीढ़ी अपने गौरवमय अतीत को हमेशा के लिए सहेज सकती है। उन्होंने भामाशाहों का सहयोग लेकर पुस्तकालयों को विकसित किए जाने का आह्वान किया।
देवनानी गुरुवार को राजस्थान विश्वविद्यालय के देराश्री सदन में भाषा एवं पुस्तकालय विभाग तथा राजाराम मोहन राय पुस्तकालय प्रतिष्ठान कोलकाता द्वारा आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश के समस्त सार्वजनिक पुस्तकालयों को 21वीं सदी की वर्तमान तकनीक एवं प्रौद्योगिकी के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि जरूरी यह कि पुस्तकालय वर्तमान एवं भावी पीढ़ी की आवश्यकताओं के अनुरूप ई-लाइब्रेरी के रूप में भी विकसित हों। उन्होंने राजकीय सार्वजनिक पुस्तकालयों में पाठकों की आवश्यकता के अनुरूप पुस्तकें रखे जाने पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर भाषा एवं पुस्तकालय विभाग के निदेशक अशफाफ हुसैन ने राज्य में संचालित सार्वजनिक पुस्तकालय सेवा एवं आम-जन को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं एवं संसाधनों का उल्लेख करते हुए पुस्तकालयाध्यक्षों से अनुरोध किया कि वे अधिक से अधिक आम-जन को जोड़ते हुए पुस्तकालय सेवा को अधिक उपयोगी बनाने का प्रयास करें।