कश्मीर में तैनात सीआरपीएफ के जवानों ने मानवता की अनोखी मिसाल पेश की है. रमजान के पाक महीने में मुस्लिम धर्म को मानने वाले सीआरपीएफ जवान भी रोजे रख रहे हैं. बुधवार को ल्यूकीमिया से पीड़ित 20 साल युवती को खून की जरूरत थी. लड़की के बचान के लिए दो जवानों ने अपना रोज़ा तोड़ दिया और रक्तदान करके मानवता का परिचय दिया.

बुधवार को सीआरपीएफ के जवान संजय पासवान, मुदासिर रसूल, मोहम्मद असलम मीर और राम निवास गुरुवार जब अपनी ड्यूटी से वापस आए, तो कैंप न जाकर रक्तदान करने के लिए सीधे शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस अस्पताल पहुंचे. इनमें से दो जवान मुदासिर रसूल और मोहम्मद असलम मीर ने रोज़ा रखा था. रमज़ान में भूखे होने की वजह से मुदासिर रसूल और असलम मीर बिना कुछ खाए खून नहीं दे सकते थे, इसलिए दोनों ने रोज़ा तोड़कर रक्तदान किया. चारों जवानों ने चार यूनिट खून लड़की को दिया.

क्या होता है ल्यूकीमिया ?

यह बीमारी अक्सर महिलाओं में होती है, इस बीमारी की वजह से शरीर में कैंसर के लक्षण बढ़ने लगते हैं और खून बनना बंद हो जाता है. ल्यूकीमिया ग्रसित मरीज को बराबर खून की जरूरत पड़ती रहती है.

बता दें सीआरपीएफ मददगार नाम से कश्मीर में हेल्पलाइन चलाता है, उस हेल्पलाइन के जरिए कश्मीर में जरुरतमंद लोग मदद की गुहार लगाते है. जवानों का यह जज्बा देश के लोगों के लिए गर्व की बात है, जो बताता है कि वे सिर्फ सीमाओं की रक्षा नहीं करते बल्कि जरूरत पड़ने पर अन्य साधनों से भी देशवासियों की सहायता कर सकते हैं.