नई दिल्ली: श्रीविद्यामठ के महंत अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वामी सानंद की मौत को हत्या बताया है. अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ये कैसे हो सकता है कि जो व्यक्ति आज सुबह तक स्वस्थ अवस्था में रहे और अपने हाथ से ही प्रेस विज्ञप्ति लिखकर जारी करें. वह 111 दिनों तपस्या करते हुए आश्रम में तो स्वस्थ रहे पर अस्पताल में पहुंचकर एक रात बिताते ही, उनकी उस समय मृत्यु हो जाए जब वह स्वयं ही उनके शरीर में आई पोटेशियम की कमी को दूर करने के लिए मुख से और इंजेक्शन के माध्यम से पोटेशियम लेना स्वीकार कर लिया हो. 

गंगा अभियान नहीं रुकेगा: अविमुक्तेश्वरानंद
उन्होंने आरोप लगाया कि हमें पूरी तरह से ये लगता है कि स्वामी सानंद हत्या हुई है. अविमुक्तेश्वरानंद ने गंगा की अविरल धारा की मांग को लेकर तपस्या कर रहे अपने शिष्य स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के अचानक हुई मौत पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि यह बताया जा रहा है कि उनको हार्ट अटैक आया. उन्होंने कहा कि ये सरकार यदि ये संदेश देना चाहती है कि जो गंगा की बात करेगा, उसकी हत्या हो जाएगी. उन्होंने कहा कि इस देश में गंगा के लिए पहले भी हमारे पूर्वजों ने बलिदान किया है और आज भी गंगा भक्त गंगा के लिए कुछ भी कर गुजरने से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद के चले जाने से गंगा अभियान नहीं रुकेगा, ये निरंतर चलता रहेगा. 


मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल (स्वामी सानंद) की मौत को सरकार के इशारे पर की गई हत्या करार दिया है. उनका आरोप है कि हरिद्वार जिला प्रशासन, एम्स के डायरेक्टर और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी स्वामी सानंद की हत्या के लिए जिम्मेदार हैं. उन्होंने इन सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की है.  स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह बताना चाहिए कि मां गंगा ने उन्हें क्या इसीलिए बुलाया था कि वे गंगा भक्तों का बलिदान लेते रहें. गुरुवार (11 अक्टूबर) दोपहर बाद जैसे ही स्वामी सानंद की मौत की खबर मिली तो मातृ सदन परिसर में शोक छा गया. मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि स्वामी सानंद की मौत नहीं हुई है.

गंगा महासभा भी सरकार से नाराज
प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल (स्वामी सानंद) की मौत मामले को लेकर सरकार के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रखने वाली गंगा महासभा नाराज दिख रही है. गंगा महासभा ने सरकार पर गंगा की अविरलता को लेकर जारी किए गए नोटिफिकेशन सहित सरकार के गंगा पर किेए जा रहे कार्यों से न सिर्फ नाराजगी दिखाई, बल्कि स्वामी सानंद की मौत को भी सरकार और मंत्रालय के तानाशाही से जोड़ दिया है. गंगा महासभा ने सरकार से अपील की है कि अब सानंद जी के गंगा बिल में बिना किसी बदलाव के सरकार को लाना चाहिए और गंगा पर कानून बनाना चाहिए.  

साढ़े चार साल में कितनी सफाई हुई: कांग्रेस 
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि स्वामी सानंद ने अपने प्राण दे दिए या कहूं कि प्राण ले लिए गए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. उनकी हत्या हुई है, यदि सरकार ने थोड़ी भी संवेदना दिखाई होती तो वो हमारे बीच रहते. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मीम अफजल ने कहा कि बहुत ही अफ़सोस की बात है कि स्वामी सानंद ने गंगा के लिए अपनी जान दी है और जो गंगा मां के बेटे थे, वो ऐश कर रहे हैं. जिन्होंने दावा किया था गंगा मां ने बुलाया था. आज उत्तर प्रदेश के लोग गंगा मैया के जबरदस्ती बनाए हुए बेटे, उनकी तरफ उम्मीद की नजर से देख रहे हैं. गंगा और जमुना की सफाई हो, इससे इस देश का एक-एक वासी मुटकीफ है, वो चाहता है गंगा और जमुना की सफाई हो. लेकिन हम पूछना चाहते हैं की पिछले साढ़े चार साल में गंगा की कितनी सफाई हुई है.

आपको बता दें कि गंगा की अविरलता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए विशेष एक्ट पास कराने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का गुरुवार (11 अक्टूबर) को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में आखिरी सांस ली. स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद 22 जून से गंगा के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर अनशन पर थे. वो आईआईटी कानपुर के पूर्व प्रोफेसर भी रह चुके हैं. इनका नाम प्रो, जीडी अग्रवाल था. सांसद रमेश पोखरियाल निशंक से वार्ता विफल होने के बाद स्वामी सांनद ने मंगलवार (09 अक्टूबर) जल भी त्याग दिया था.