नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट के प्रशासन में प्रशासकों की समिति (सीओए) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के बीच का टकराव सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। सीओए ने ने आरोप लगाया है कि बीसीसीआई के अधिकारी - कार्यकारी अध्यक्ष सीके खन्ना, कार्यकारी सचिव अमिताभ चौधरी और कोषाध्यक्ष अनिरूद्ध चौधरी - उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश को ‘पलटने और बाधित’ करने का प्रयत्न कर रहे हैं। इस तरह का आरोप तो पहले भी लगता था लेकिन सुप्रीम कोर्ट में इनका जिक्र इतनी स्पष्टता से अब हुआ लगता है।

उच्चतम न्यायालय को अपनी नौंवी दर्जा रिपोर्ट में सीओए ने कहा, ‘‘बीसीसीआई के अधिकारी 22 जून 2018 को हुई बैठक में भाग लेने वाले अन्य लोगों के साथ मिलकर मानद उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश को पलटने और बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा प्रशासकों की समिति की योग्यता में बाधा डालने के उद्देश्य से किया जा रहा है।’’ लोढ़ा सिफारिशों को लागू करने के लिये उच्चतम न्यायालय की सुनवाई कल होगी जिससे अधिकारी सीओए की दर्जा रिपोर्ट के बारे में टिप्पणी नहीं करना चाहते लेकिन उनके करीबी सूत्रों ने कहा कि अभी तक विनोद राय की अगुवाई वाली संस्था ने जिस तरह से काम किया है, ‘वे इस तरीके से बिलकुल भी हैरान’ नहीं हैं।

एक अलग आरोप में उसने लिखा कि कोषाध्यक्ष चौधरी ने जानबूझकर उत्तराखंड और मिजोरम को रणजी ट्राफी में भाग लेने से रोकने का प्रयास किया और इस मामले को 22 जून को हुई विशेष आम बैठक में उठाया जिसे सीओए ने अमान्य करार दिया क्योंकि पहले से इसकी अनुमति नहीं ली गयी थी। 

उल्लेखनीय है कि हाल ही में विनोद राय ने डीडीसीए पर टिप्पणी की थी कि डीडीसीए के चुनाव परिणामों को ‘नैतिक और संवैधानिक कमियों के चलते’ रद्द किया जा सकता है। जबकि तीन दिन पहले सोमवार को ही रजत शर्मा ने डीडीसीए चुनावों में ऐतिहासिक जीत हासिल करते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंदी पूर्व क्रिकेटर मदनलाल को हराया था।

नियमों के मुताबिक नहीं हुए थे चुनाव
राय के मुताबिक यह चुनाव सुप्रीम कोर्ट से अनुमोदित संविधान के अनुसार नहीं कराए गए थे। इस वजह से इन्हें बाद में रद्द किया जा सकता है। राय ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो हितों के टकराव की स्थितियों से बचने के लिए जो नियंत्रण और संतुलन के लिए व्यवस्थाएं दी हैं उन्हें लागू करने में डीडीसीए नाकाम रही है। यहां यह कहना लाजमी होगा कि लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने के मामले में बीसीसीआई की अनेक ईकाइयां नाकाम रहीं हैं। समिति की सिफारिशों को लागू करने में बीसीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में भी कई व्यवहारिक परेशानियों का जिक्र किया था जिसके बाद खुद सुप्रीम कोर्ट ने खुद बोर्ड से संविधान बनाने के सुझाव भी मांगे थे।