जयपुर:सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर यहां झालाना संस्थानिक क्षेत्र स्थित राइसेम सहकारी संस्थान में पौधरोपण कर प्रदेश में सहकारी संस्थाओं द्वारा एक लाख पौधे लगाने के अभियान की शुरुआत की। इस मौके पर आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि मिलजुल कर सकारात्मक सोच के साथ किसी भी कार्य को करने से अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।
उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र में विपुल संभावनाएं हैं और सहकारिता वह माध्यम है जिसमें सहयोग की भावना से एक-दूसरे का विकास होता है। उन्होंने कहा कि जीवन में बहुत सारी समस्याएं हैं, लेकिन हमें इन समस्याओं से उबरने के लिये हमेशा प्रयासरत रहना चाहिए। वर्तमान समय में उपभोग एवं उत्पादन में साम्यता स्थापित कर भावी पीढ़ी के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखना होगा।
किलक ने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम हमारे दृष्टिकोण में परिवर्तन लाएं और लगातार आर्थिक, सामाजिक कार्यों के साथ पर्यावरण सुरक्षा के लिए भी कार्य करें। यदि हम पूरी लगन एवं समर्पण के साथ मिलकर कार्य करेंगे तो हम राजस्थान को सूखे प्रदेश से हरे-भरे प्रदेश में परिवर्तित कर आने वाली पीढ़ी के भविष्य को संवार सकते हैं।
रजिस्ट्रार सहकारिता राजन विशाल ने कहा कि सहकारिता वह क्षेत्र है जिसके साथ लोगों का सीधा जुड़ाव है। समाज के प्रति निष्ठा सहकारिता का वह सशक्त आधार है जो समाज को सतत उपभोग एवं उत्पादन की ओर ले जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज सहकारिता के माध्यम से सतत विकास में एक और कड़ी जुड़ गई, जो पौधरोपण के रूप में पर्यावरण को समर्पित की गई है।
विशाल ने कहा कि पौधे के पनपने को निरीक्षण एवं देखभाल के द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सहकारिता में काफी काम हुआ है, लेकिन अभी भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने आह्वान किया कि सभी सहकार बंधु प्रण लें कि सहकारिता के आंदोलन को मजबूत करते हुए एक स्वस्थ समाज के निर्माण में अपना सहयोग देंगे।
राजफैड की प्रबंध निदेशक डॉ. वीना प्रधान ने कहा कि सहकारिता ने एक और अच्छा नवाचार कर एक लाख से अधिक पौधे लगाने का अभियान हाथ में लिया है, जो कहीं न कहीं सहकारिता के मूल को स्पष्ट करता है। उन्होंने कहा कि सहकारित नित नए आयाम स्थापित कर रहा है, चाहे वह उपज की खरीद हो या ब्याज मुक्त फसली ऋण वितरण हो, या फिर संस्थाओं द्वारा समाज हित में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का हो। उन्होंने कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि समाज में सहकारिता की भावना को प्रबल तरीके से विभिन्न कार्यों में समाहित करें, जिससे बेहतर सोच के साथ बेहतर समाज का भी निर्माण हो सके।