नई दिल्ली:पुरानी दिल्ली के मशहूर राबिया गर्ल्स पब्लिक स्कूल में बच्चियों को बेसमेंट में बंद रखने का मामला तुल पकड़ता दिख रहा है। आज दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया स्कूल के दौरे पर पहुंचे। इस शर्मनाक हरकत के बाद केजरीवाल ने कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और जो दोषी होगा उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। मुख्‍यमंत्री केजरीवाल ने कहा, '' मैंनें स्कूल की प्रिंसिपल फराह दिबा से बातचीत की है और उन्हें हिदायत भी दी है कि इस प्रकार की घटनाएं भविष्य में नहीं होनी चाहिए। मैंने परिजनों से भी बात की है। पूरे मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।''

इसी बीच स्कूल की पूर्व छात्राओं ने तमाम आरोपों को गलत बताया। इनके मुताबिक स्कूल को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, "हमारे स्कूल को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है ऐसा कुछ नहीं किया गया और छोटी छोटी बच्चों को सिर्फ बेसमेंट में बाक़ी बच्चों से अलग रखा गया था। वो बेसमेंट एक तरीके से एक्टिविटी रूम है। बच्चों को तहखाने में बंद नहीं किया गया था। स्कूल की इमेज खराब करने के लिए ये खबर फैलाई जा रही है हम स्कूल के सपोर्ट में हैं। हमने इतने साल स्कूल में पढ़ाई की है कभी भी हमारे साथ ऐसा नहीं हुआ है।''

स्कूल के म्यूजिक टीचर हरविंदर सिंह ने बताया ये सारे आरोप गलत हैं। हरविंदर सिंह के मुताबिक ये बेसमेंट में नहीं बल्कि एक्टिविटी रूम है। उन्होंने कहां, ''यहां की तस्वीरें देखकर आप सब पता लगा सकते हैं कि ये बेसमेंट में नहीं बल्कि एक्टिविटी रूम है। जिन बच्चों के पेरेंट्स ने फीस नहीं भरी थी उनके बच्चों को यहां अलग से रखा गया था ताकि उनके पेरेंट्स से फीस को लेकर बात की जा सके। थोड़ी ही देर के लिए बच्चों को बेसमेंट में रखा गया था।''
क्या था पूरा मामला?
आरोप है कि पुरानी दिल्ली के मशहूर राबिया गर्ल्स पब्लिक स्कूल में 4-4 साल की बच्चियों को 5 घंटे तक बेसमेंट में बंद करके रखा गया। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल मैनेजमेंट ने फीस न जमा करने के चलते बच्चियों को घंटों रोके रखा। इस बाबत उन्होंने स्कूल मैनेजमेंट के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। राबिया गर्ल्स पब्लिक स्कूल हमदर्द ग्रुप के तहत चलता है और जिसकी फीस 2500 से 2900 रुपये के करीब है। हालांकि जिन बच्चियों को बेसमेंट में रखा गया है, उनमें से कुछ के अभिभावकों के मुताबिक, उन्होंने एडवांस में स्कूल फीस जमा कर दी थी।