नई दिल्ली:दिवाली पर घर-आफिस को सजाने से लेकर खुद के लिए नए कपड़े और जूते-सैंडिल खरीदने का सिलसिला एक महीने पहले से ही शुरु हो जाता है. बच्चे भी इस दौड़ में पीछे नहीं रहते हैं. उनकी तैयारी पटाखों से शुरु होती है. थोक और रिटेल के कारोबारियों की मानें तो दिवाली का यह कारोबार हज़ारों करोड़ रुपये का है. करीब 40 हज़ार करोड़ रुपये का तो अकेले चीन से ही सामान आता था. इसमे 5 रुपये वाली फुलझड़ी से लेकर हज़ारों रुपये की कीमत वाले फैंसी आइटम तक थे. जो कि भारत-चीन के विवाद के चलते समय पर नहीं आए. ऐसे में दिवाली पर ही चीन को अच्छा खासा नुकसान हुआ है.

दीवाली पर अधिकांश सामान चीन से आता है - कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल बताते हैं कि, चीन से घर-ऑफिस के सजावटी आइटम समेत दिवाली पर होने वाली पूजा में शामिल सभी आइटम अब आने लगे हैं. इसमे बेहद खूबसूरत दिखने वालीं लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्तियां भी शामिल हैं. इसके साथ ही बच्चों और बड़ों के लिए पटाखों का बाज़ार भी है.
वहीं दिवाली से एक महीना पहले चलने वाली खरीदारी में फैब्रिक, टेक्सटाइल, हार्डवेयर, फुटवियर, गारमेंट्स, किचन प्रोडक्ट, गिफ्ट आइटम, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन, घड़ियां, ज्वेलरी, घरेलू वस्तुएं, फर्नीचर, जलती-बुझती रहने वाली छोटी-छोटी लाइटें (फेयरी लाइट्स), साज-सज्जा के सामान और फैंसी लाइट, लैंपशेड और रंगोली शामिल है. लेकिन डोकलाम, लद्दाख आदि इलाकों में ताजा विवाद के चलते रत्तीभर भी सामान चीन से नहीं आया है.

विदेशों में भी भारतीय सामान की डिमांड बढ़ी - कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि, देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भारतीय सामानों की मांग बढ़ गई है. इस साल दिवाली से जुड़े देसी समानों जैसे दीये, बिजली की लड़ियां, बिजली के रंग बिरंगे बल्ब, सजावटी मोमबत्तियां, सजावट के समान, वंदनवार, रंगोली व शुभ लाभ के चिह्न, उपहार देने की वस्तुएं, पूजन सामग्री, मिट्टी की मूर्तियां समेत कई सामान का उत्पादन भारतीय कारीगरों ने ही किया है. देसी कारीगरों के हुनर को भारतीय व्यापारी बाजारों तक पहुचाएंगे. इसके अलावा ऑनलाइन, सोशल मीडिया प्रोग्राम और वर्चुअल प्रदर्शनी के जरिये भी देशभर में इन सामानों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी.