नई दिल्ली:उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के तिरप सेक्टर में एंबुश लगाकर किए गए हमले में असम राइफल्स के एक जवान (Assam Rifles soldier) की शहादत हुई है. इस हमले के साथ उत्तर पूर्वी राज्यों में उग्रवाद (insurgency in the northeast) को बढ़ावा देने के चीन के रोल पर आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं.

गौरतलब है कि करीब एक सप्ताह पहले चीन ने धमकी दी थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ताइवान के साथ व्यापार पैक्ट पर हस्ताक्षर ना करें नहीं तो वो उत्तर पूर्वी राज्यों में अलगाववादियों को समर्थन दे सकता है. असम राइफल्स के जवान पर हुए हमले में नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम का रोल बताया जा रहा है.

उग्रवादी संगठन के चीन के साथ पुराने लिंक
भारतीय सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस संगठन का लंबे समय से चीन से लिंक रहा है. और हालिया हमले के साथ चीनी धमकी की टाइमिंग भी बिल्कुल मेल खा रही है. हालांकि मणिपुर और नागालैंड में अलगाववादी उग्रवादी संगठनों का चीन के साथ लिंक का इतिहास पुराना है.
चीन का नॉर्थ ईस्ट में संलिप्तता का पुराना इतिहास

नॉर्थ-ईस्ट के एक्सपर्ट बर्टिल लिंटनर ने अपनी किताब Great Game East: India, China and the struggle for Asia’s most volatile frontier में लिखा है कि कैसे उत्तर पूर्वी उग्रवादी संगठन के नेता ने बीजिंग की यात्रा की थी.

शिवशंकर मेनन ने जाहिर की थी चिंता
साल 2012 में भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर रहे शिवशंकर मेनन द्वारा उग्रवादी संगठनों के साथ चीनी लिंक को लेकर दोनों देशों के बीच विशेष बातचीत में चिंता जाहिर की गई थी. लेकिन चीनी अधिकारी की तरफ से इस बात से साफ इनकार किया था कि उनका कोई रोल उत्तर पूर्व के उग्रवाद में है. एक अन्य एक्सपर्ट का कहना है कि चीन चाहता है कि भारत के उत्तर पूर्वी इलाकों में हालात असामान्य बने रहें.